संगड़ाह में ‘रंगीला म्हारो ढोलणा’

संगड़ाह। हरियाली मेला संगड़ाह की आखिरी सांस्कृतिक संध्या में दर्शक छात्राओं द्वारा ‘रंगीला म्हारो ढोलणा’ पर किए गए मारवाड़ी नृत्य पर जमकर झूमे। कविता, पूजा, प्रियंका, अर्चना व अंबिका आदि छात्राओं द्वारा राजस्थानी वेशभूषा में किए गए ‘घूमर’ नृत्य पर जमकर तालियां बजीं। स्थानीय छात्राओं द्वारा ‘हिमदर्शन’ में प्रदेश की लोक संस्कृति की झलक बिखेरी गई। जमा दो स्कूल संगड़ाह के छात्र-छात्राओं द्वारा सिरमौरी थाती-ठारी स्तुती गान से लोक नृत्य का आगाज किया गया। वीरेंद्र, अमृता, अर्जुन व कमलेश आदि द्वारा प्रस्तुत ‘नाटी हेरे बाबा सिदुआ’ व ‘गिरिओ रो पाणी’ पर न केवल दर्शक, बल्कि मुख्यातिथि राज्य सहकारी बैंक अध्यक्ष चंद्रमोहन ठाकुर भी झूम उठे। सोमवार देर शाम तक चली इस संध्या से पूर्व रविवार को आयोजित दूसरी सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक राजेश मलिक के गीतों का जादू चला। ‘चाकुरे दी कांडी’, ‘हाय नाजरोये’ व ‘बाशो ला बीआ’ आदि गीतों से मलिक ने दर्शकों का बांधना शुरू किया। उनकी मशहूर नाटी ‘बागो सयाणा भादरूआ’ पर तो दर्जनों युवा श्रोता खुलकर नाचे। उनके गीतों  पर नाटी कर रही अदाकारा कुमारी विजय व किरण के ठुमकों, अदाओं व भाव-भांगिमाओं पर भी युवा झटके खाते देखे गए। लोक गायक सुर्जन चौहान, जेपी शर्मा, ओम प्रकाश व हरिचंद चौहान आदि के लोक गीतों ने भी तालियां बटोरीं।

सोमवार मध्य रात्रि तक चली इस संध्या के मुख्यातिथि तहसीलदार संगड़ाह थे, जबकि स्वतंत्रता दिवस समारोह में शिक्षा मंत्री आईडी धीमान के समक्ष भी कार्यक्रम हुए। इससे पूर्व हरियाली मेला संगड़ाह की पहली सांस्कृतिक संध्या में दर्शक लोक गायक राजेश मलिक व अन्य कलाकारों की नाटियों पर जमकर झूमे। कार्यक्रम का आगाज स्थानीय लोक गायक सुर्जन चौहान ने झूरी गीत ‘घोणियों केलटी, बिलड़े बानो’ से किया तथा इसके बाद ‘दुधो मांजे रा खोआ व लाई नारणा पांडी’ आदि नाटियों से वाहवाही लूटी। हरिचंद चौहान ने सिरमौरी नाटी ‘उड़ो शाकरा-माटा, बीणी रे कोबे दा उबा’ व ‘छुपकुआ’ आदि पेश की। लोक गायक ओम प्रकाश ने पारंपरिक ‘भरतहरी गाथा’ से समां बांधा, जबकि जेपी शर्मा ने ‘एशी सोहणी भादरी’ व ‘कलजुगो दा धोखा’ आदि नाटियों से दर्शकों को थिरकने पर मजबूर किया। संगड़ाह का पारंपरिक हरियाली मेला यहां की प्राचीन संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।

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