सबसे बढि़या राष्ट्रपति कौन

डा. अब्दुल कलाम राष्ट्रपति भवन में एक स्पेस साइंटिस्ट के रूप में विख्यात व्यक्ति की तरह आए, जो अपने कामों के लिए पहले ही सम्मानित हो चुके थे। 1981 में पद्म विभूषण, 1991 में पद्म भूषण और 1997 में भारत रत्न। वह अपने महल में आराम नहीं करते थे, बल्कि लोगों को प्रेरणास्पद संदेश भी देते रहे…

अगर आज यह जानने के लिए पब्लिक ओपीनियन पोल कराया जाए, कि आज तक के हमारे राष्ट्रपतियों में से किसे आम आदमी सर्वश्रेष्ठ मानता है, मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि एपीजे अब्दुल कलाम सबकी एकमात्र पसंद बनकर सामने आएंगे। इसकी वजह सादा है ः उनमें से ज्यादातर राजनीतिज्ञ थे, जिनका कैरियर राष्ट्रपति भवन में जाकर समाप्त हुआ और भारतीयों के मन में राजनीतिज्ञों के लिए ज्यादा आदर नहीं होता। दूसरा यह कि राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन अकादमिक से थे, अब्दुल कलाम साइंटिस्ट। राधाकृष्णन हिंदू धर्म के विद्वान और महान वक्ता थे, लेकिन उनकी कथनी और करनी में अंतर रहता था। वह चमचागिरी में लिप्त रहे और ऐसे लोगों को संरक्षण दिया, जो कि उस सम्मान के अधिकारी नहीं थे, जो उन्होंने उन्हें दिया। जाकिर हुसैन भी बहुत अधिक सम्मानित विद्वान थे, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति से अपेक्षित कर्त्तव्यों का निर्वाह करने के अतिरिक्त बहुत कम काम किया। अब्दुल कलाम राष्ट्रपति भवन में एक स्पेस साइंटिस्ट के रूप में विख्यात व्यक्ति की तरह आए, जो अपने कामों के लिए पहले ही सम्मानित हो चुके थे। 1981 में पद्म विभूषण, 1991 में पद्म भूषण और 1997 में भारत रत्न। वह अपने महल में आराम नहीं करते थे, बल्कि लोगों को प्रेरणास्पद संदेश भी देते रहे। वह हमारा आत्मविश्वास बढ़ाने वाले प्रमुख व्यक्ति बन गए। अपने कॉलम में उनकी पहली किताब छपने के बाद जब मैं लिखने लगा, तो मैं उसकी धज्जियां उड़ाने के बारे में सोच रहा था-राष्ट्रपति हो या न हो, लेकिन जैसे ही मैंने पूरी किताब पढ़ी, मेरा मन बदल गया और मैंने उसकी प्रशंसा की।

अब मेरे पास उनकी दूसरी पुस्तक है  यह प्रश्नों के उत्तरों का संग्रह है, जो कि देश भर से युवा, स्त्री, पुरुषों ने उनसे पूछे थे, उन्हें जो कुछ कहना है वह शुरू की कुछ पंक्तियों में उन्होंने कह दिया। यदि 540 मिलियन युवा इस भावना के साथ काम करें, ‘मैं यह कर सकता हूं’ हम यह कर सकते हैं और भारत यह कर सकता है, तो कोई भी ताकत भारत को विकसित देश बनने से नहीं रोक सकती।’

मैं उनके नजरिए का एक और उदाहरण देता हूं। जाति और सांप्रदायिक भावनाओं के बारे में एक सवाल के बारे में उन्होंने कहा, ‘जो  समाज सीमाओं में बंधा नहीं होता, केवल वही एक ऐसे समाज के बारे में सोच सकता है, जिसमें जाति और समुदाय का कोई भेदभाव न हो।’ हमारे समाज को जाति और समाज के वर्तमान ढांचे में ढलने में सदियां लग गईं। प्रेम, सहनशक्ति, अच्छे कानून और न्याय ही हमारे समाज को एक बंधनहीन समाज में बदलने के सर्वश्रेष्ठ उपकरण हैं, जहां सेवा करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होठों से बेहतर होते हैं।’

अब हमारे यहां पहली महिला राष्ट्रपति हैं। वह एक वैभवशाली महिला हैं, लेकिन उनकी भी राजनीतिज्ञ पृष्ठभूमि है। मुझे सबसे ज्यादा बात यह चुभती है कि वह ज्योतिष में भी यकीन रखती हैं। मुझे उन लोगों से एलर्जी है, जो इसमें यकीन करते हैं और मैं समझता हूं कि जो व्यक्ति इतने महत्त्वपूर्ण पद पर हो, उसे इस तरह के ढोंग में यकीन नहीं
करना चाहिए।

घोटाले जिंदाबाद

नेताओं की माशूकाएं, मर्सिडीज और उनकी

पत्नियों के सैंडल जिंदाबाद

हमारे घपले और घोटाले जिंदाबाद

शाबाश, लहर के साथ चलते रहो

बजाय इसके कि यह सोचो कि किसी ने ई-मेल

बदल दी या झूठ बोल दिया

हम क्यों अपने कॉमनवैल्थ खेलों की गरिमा कम करें क्या हमारा कोई राष्ट्रीय गौरव नहीं है क्या हुआ जो आर्गेनाइजरों ने 90 प्रतिशत पैसा खा लिया

कम से कम वह दस प्रतिशत खर्च कर रहे
हैं जानेमन

क्या हुआ जो दिल्ली टूटी-फूटी है जैसे मानो

नादिरशाह ने हमला कर दिया हो

क्या हुआ जो स्टेडियम उद्घाटन के वक्त ही टपकने लगें।

पूरा पैसा अच्छी तरह खर्च किया गया है

क्या हुआ जो दाम एक हजार प्रतिशत बढ़ गए

और चाहे बाजार में दाम ट्रेडमिल के किराए से भी कम हों

सब्र करो और अपने महान देश के बारे में सोचो

यह सोचो कि आर्गेनाइजिंग कमेटी ने कितनी जी तोड़ मेहनत की है

दिल छोटा मत करो और कुछ
आशावादी बनो

इस तरह के मौके हर रोज नहीं आते

(कुलदीप सलील ने दिल्ली से भेजा)

नाखून चबाना

पप्पू के माता-पिता ने उसका नाखून चबाना रोकने के लिए भरसक प्रयत्न किया। रविवार की सुबह परिवार पिकनिक मनाने कुतुबमीनार गया। वह मीनार की पहली मंजिल पर चढ़ गए। नीचे उतरते समय वह एक गर्भवती महिला के सामने आ गए, जो कुछ सीढि़यां चढ़ने के बाद थक कर रुक गई थी। पप्पू ने अपनी  मां से पूछा, ‘यह महिला इतनी मोटी क्यों है। मां ने जवाब दिया, ‘क्योंकि  यह अपने नाखून चबाती है।’

महिला ने यह बात सुन ली और पप्पू से पूछा ‘बच्चे क्या तुम मुझे जानते हो।’

‘नहीं’ पप्पू ने जवाब दिया, ‘लेकिन मैं जानता हूं आप क्या करती रही हैं।’

(जेसी मेहता ने दिल्ली से भेजा)

You might also like