समस्याओं की नई शिकायत प्रणाली

अब आप अपने शहर से जुड़ी तमाम समस्याओं के समाधान के लिए घर बैठे ही शिकायतों का पिटारा भर कर उसे ताले में बंद करके रख सकते हैं। कुछ ही समय में ऐसे कई पिटारे आपके घर में जमा हो जाएंगे। बस आप इन पिटारों को एक साथ प्रशासन को न सौंपें, वरन सब गड़बड़ हो सकती है। आप समय-समय पर समस्याओं से भरे किसी एक पिटारे को प्रशासनाधिकारी के कार्यालय में ले जाकर उसमें से आंख मीच कर एक शिकायत पत्र निकाल कर वहां बैठे कर्मचारी को दे दें। कुछ दिन तक इंतजार करने के पश्चात जब उक्त समस्या का कोई हल न निकलता देखें, तो फिर से पिटारा लेकर उस कार्यालय में पहुंच जाएं तथा एक अन्य शिकायत पत्र वहां बैठे कर्मचारी को सौंप दें। पत्र देने के बाद एक बात का विशेष ध्यान रखें तथा वहां पर रखी रद्दी की टोकरी में अवश्य झांक लें कि पहले दी गई शिकायत पत्रिका उसमें तो नहीं फेंकी गई है। अब आप देखेंगे कि एक-एक कर जितनी भी शिकायतें प्रशासन को सौंपी गई थीं, उनका कोई भी समाधान नहीं निकल पाया। अब आप उन तमाम समस्याआंे तथा उनके  समाधान के लिए लिखी गई शिकायतों का ब्यौरा एकत्रित करके उन्हें किताब के रूप में लिख डालिए तथा उसे प्रकाशित करवा कर बाजार में बिकने के लिए भेज दीजिए। आप देखेंगे कि आपकी वे तमाम किताबें धड़ाधड़ बिक जाएंगी। इससे आपके शहर की समस्याओं का तो कोई समाधान बेशक नहीं हुआ होगा, परंतु आपकी जेबें अवश्य नोटों से भर जाएंगी। एक विशेष सलाह मैं आपको अवश्य दूंगा कि आप अपने मोबाइल का स्विच आफ ही रखें, क्योंकि हो सकता है कि आपकी उन किताबों को पढ़-पढ़कर आपको अनगिनत पाठकों के फोन अवश्य आएंगे और यदि आपका मोबाइल स्विच ऑन रहा, तो आपके मोबाइल की बैटरी अवश्य समाप्त हो जाएगी। समस्याएं तो हर क्षेत्र में हैं, लेकिन उनका समाधान नहीं हो पाता।

पे्रमपाल महिंद्रू, नाहन

You might also like