सरकारी विभागों ने वकीलों पर लुटाए तीन करोड़

शिमला। प्रदेश सरकार के विभाग और दूसरे संस्थान  कानूनी पचड़ों में फंसे हैं। कानूनी मामलों को हल करने के लिए ये विभाग लगातार अदालती कार्रवाई झेल रहे हैं। वकीलों पर इन विभागों व दूसरे संस्थानों ने दो साल में करीब तीन करोड़ रुपए की राशि खर्च कर दी है। इस पर लगाम लगाने के लिए अब तक सरकार की तरफ से कोई सख्त निर्देश विभागों को नहीं दिए गए हैं, लिहाजा कानूनी मामले लगातार बढ़ रहे हैं।  प्रदेश सरकार के बिजली बोर्ड ने इन दो वर्षों में अकेले वकीलों की फीस पर करीब एक करोड़ रुपए की राशि खर्च कर दी है। विधानसभा में दी गई लिखित जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड पर इस समय 303 कानूनी मामले चल रहे हैं और उसने वकीलों की फीस के रूप में एक करोड़ दो लाख 27 हजार 785 रुपए खर्च किए हैं। इसी तरह से  वन विकास निगम ने कानूनी मामलों के निपटारे के लिए वकीलों पर  31 लाख 2 हजार 83 रुपए खर्च किए हैं। यह निगम घाटे में चल रहा है और घाटे से उभारने के लिए कई प्रयास भी किए जा रहे हैं। लेकिन निगम कानूनी पचड़े में फंसा है, लिहाजा उसका इतना पैसा वकीलों की फीस पर ही उड़ गया है। निगम के साथ इस समय 85 अदालती मामले विभिन्न जगहों पर चल रहे हैं।

 इसके बाद डा. वाईएस परमार औद्यानिकी विश्वविद्यालय नौणी में इस समय कानूनी मामले तो छह चल रहे हैं, लेकिन वकीलों पर धनराशि काफी खर्च की गई है। बताया जाता है कि इस विश्वविद्यालय ने वकीलों की फीस पर 11 लाख 64 हजार 508 रुपए का खर्च किया है। वकीलों पर खर्च करने में नगर निगम शिमला भी पीछे नहीं है। नगर निगम ने 10 लाख 70 हजार 700 रुपए वकीलों की फीस के अदा किए हैं। नगर निगम में ऐसे मामलों की संख्या 16 है। एग्रो इंडस्ट्रीज पैकेजिंग इंडिया लिमिटेड ने 46 हजार 598 रुपए, कृषि उद्योग निगम ने 32 हजार, 250, हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व सैनिक निगम ने 5 लाख 88 हजार 090, प्रदेश वित्त निगम ने 8 लाख 36 हजार 345, सामान्य उद्योग निगम ने 2 लाख 28 हजार 742 रुपए वकीलों को फीस के रूप में इन दो सालों में दिए हैं।  एचपीएमसी ने इस अवधि में 3 लाख 23 हजार 720, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निगम ने 76 हजार 981, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 40 हजार 769, राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ हिमफेड ने 78 हजार 850 रुपए, राज्य औद्योगिक विकास निगम ने 10 लाख 89 हजार 136 रुपए,  राज्य लघु उद्योग एवं निर्यात निगम समिति ने 1 लाख 17 हजार 850 रुपए,  पर्यटन विकास निगम ने दो लाख 84 हजार 350 रुपए, परिवहन निदेशालय ने 90 हजार रुपए, आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण ने 10 लाख 37 हजार 819 रुपए का व्यय किया। इसी तरह से खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने 1 लाख 71 हजार 100 रुपए नागरिक आपूर्ति निगम ने 5 लाख 14 हजार 653 रुपए, दुग्ध प्रसंघ ने करीब 80 हजार, सरकार उर्जा विकास अभिकरण ने 3 लाख 23 हजार 821 रुपए, स्टेट इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन ने एक लाख 39 हजार 460 रुपए, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम ने 41 हजार 403 रुपए, सहकारी ऊन एकत्रिकरण प्रसंघ ने 46 हजार 750 रुपए, कृषि विपणन बोर्ड खलीणी ने 15 लाख 40 हजार 130 रुपए, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम ने एक लाख 22 हजार 138 रुपए स्कूल शिक्षा बोर्ड ने तीन लाख 14 हजार 361 रुपए, एचपीयू ने चार लाख 97 हजार 604, कृषि विवि ने तीन लाख 46 हजार 500, नाहन फाउंडरी ने 219625 रुपए वकीलों की फीस के अदा किए हैं।

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