सरकार क्या जाने बेरोजगारों का दर्द!

केंद्र सरकार, प्रदेश की सरकार या फिर सरकार चाहे जो भी हो ये क्या जानें बेरोजगारी का दर्द। हम उन डेंटल मेकेनिक्स प्रशिक्षित बेरोजगारों की बात कर रहे हैं, जो कई सालों से यह कोर्स करके घर पर बैठने को मजबूर हैं। लाखों का वेतन व भत्ते पाने वाले मंत्री या विधायक महज आपस में इन विषयों में चर्चा न करने की बजाय अपने हितों के बारे में सोचते हैं।  अगर सरकार हिमाचल में डेंटल डाक्टरों के 375 पदों को भरने के बारे में सोच सकती है, तो डेंटल मेकेनिक्स के पदों को भी सृजित कर ही सकती है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अगर डेंटल मेकेनिक्स की नियुक्ति की जाती है, तो स्वास्थ्य सेवाओं को एक अच्छे तरीके से सदृढ़ किया जा सकता है। सरकार ने 2008 में डेंटल हाइजनिसंट के पदों को काफी संख्या में विज्ञापित किया था, जबकि डेंटल मेकेनिकों के महज छह पदों को ही विज्ञप्ति किया, जिसमें चार पदों पर ही रोजगार दिया, बाकी दो पदों को वैसे ही रहने दिया, ताकि शायद सरकार पर ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़ सके।

 मनीष, भरत (डेंटल मेकेनिक) भटियात, रिवालसर मंडी

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