सिख छोड़ें कश्मीर

नई दिल्ली। घाटी के सिखों को मुस्लिम आतंकियों ने तुगलकी फरमान सुनाते हुए धमकी दी है कि अगर वे इस्लाम को क बूल करते हैं, तो घाटी में रह सकते हैं, अन्यथा घाटी छोड़ कर चले जाएं। 60 हजार की आबादी वाली सिख कम्युनिटी घाटी में दूसरी सबसे बड़ी अल्पसंख्यक जाति है। आतंकियों द्वारा भेजे गए खतों में साफ तौर पर कहा गया है कि या तो इस्लाम को गले लगाओ और घाटी में हो रही नागरिकों की हत्याओं का विरोध करें या फिर अपना सामान बांधने की तैयारी कर लें। ऑल पार्टी सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी के कई सदस्यों को हस्ताक्षर के विभिन्न जगहों से इस प्रकार ये धमकी भरे पत्र मिल रहे हैं। पार्टी संयोजक जगमोहन सिंह रैना ने कहा कि वे इसके खिलाफ संघर्ष को तैयार हैं। रैना को इस विषय में हुर्रियत, जेकेएलएफ और पाक अधिकृत कश्मीर स्थित यूनाइटेड  जिहाद काउंसिल से इस विषय में गंभीर कदम उठाने की मांग की है, वहीं कट्टरपंथी अलगावाद के समर्थक सैय्यद अली शाह जिलानी ने कहा है कि सिखों को किसी से डरने की जरूरत नहीं है और इस प्रकार के झूठे पत्रों पर ध्यान न दें। प्रदेश की अकाली दल यूनिट (बादल) के अध्यक्ष अजीत सिंह मस्ताना ने कहा कि ये धमकियां हमें हमारी मातृभूमि से अलग नहीं कर सकतीं।

इस बीच सिखों को इस्लाम कबूल करने या पथराव बिग्रेड में शामिल होने अथवा घाटी छोड़कर चले जाने की खबरों से शुक्रवार को राज्यसभा गुस्से से उफन पड़ी और सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद तभी पटरी पर आई, जब गृह मंत्री पी चिदंबरम ने विशेष तौर से सदन में आकर आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर सरकार सिखों को पूरा संरक्षण देगी।

 श्री चिदंबरम ने कहा कि कम से कम एक मामला ऐसा सामने आया है, जिसमें एक सिख के अधिकारों का हनन किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने राज्य के मुख्यमंत्री से बात की है और उन्होंने मुझे पूरी तरह आश्वस्त किया कि सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। श्री चिदंबरम ने कहा कि राज्य से सिखों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की है और मैं उनका स्वागत करता हूं। बाद में शून्यकाल के तहत यह मामला उठाते हुए भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि पूरा देश सिखों के खिलाफ इस अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगा। शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि घाटी में एक लाख सिख थे, जिनकी संख्या अब 50 हजार ही रह गई है। भाजपा के बलबीर पुंज और चंदन मित्रा की आशंका थी कि घाटी में इसी तरह की धमकियां कश्मीरी पंडितों को मिलती थीं और सरकार उनकी रक्षा का भी आश्वासन दिया करती थी, जिसका कोई असर नहीं हुआ था। भाजपा के प्रभात झा ने लेह त्रासदी का मामला उठाया और कहा कि वहां हालात अब भी बदतर बने हुए हैं।

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