सिब्बल से नाक रगड़वाकर माने आनंद

एजेंसियां, नई दिल्ली

मानव विकास मंत्रालय द्वारा नागरिकता पर सवाल उठाए जाने से नाराज विश्वनाथन आनंद कपिल सिब्बल द्वारा माफी मांगे जाने पर मानद उपाधि लेने को तैयार हो गए हैं। इससे पहले आनंद ने नागरिकता पर सवाल उठाए जाने पर डिग्री लेने से इनकार कर दिया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नजरों में शतरंज के ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद भारतीय नहीं हैं। यही वजह है कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी से आनंद को डॉक्टरेट की उपाधि दिए जाने के मामले पर अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हुए मामला विदेश मंत्रालय को रैफर कर दिया। मानव संसाधन मंत्रालय को लगता है कि आनंद स्पेनिश हैं। हालांकि अपने मंत्रालय के बाबुओं की गलती के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटे केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने विश्वनाथन आनंद से माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि आनंद को उपाधि दिए जाने के मामले में जो भी तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा और आनंद को मानद उपाधि दी जाएगी। आनंद से बात करने के बाद सिब्बल ने कहा कि उनकी नागरिकता को लेकर कोई सवाल नहीं है। बताया जा रहा है कि सिब्बल से बात करने के बाद आनंद डॉक्टरेट की उपाधि लेने के तैयार हो गए हैं। इससे पहले विवाद के बाद आनंद ने कहा था कि उन्हें डॉक्टरेट नहीं चाहिए। इसके बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी को आनंद को मानद डिग्री देने का कार्यक्त्रम टालना पड़ा था। हैदराबाद यूनिवर्सिटी ने आनंद को मानद डॉक्टरेट देने का फैसला किया है। कायदे से इस बारे में आखिरी फैसला केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को देना होता है, लेकिन मंत्रालय के पास जब यह मामला इसी साल जुलाई के महीने में आया तो उसका कहना था कि उनकी नागरिकता के बारे में विदेश मंत्रालय ही फैसला लेगा। मानव संसाधन मंत्रालय को लगता है कि चूंकि आनंद स्पेन में रहते हैं इसलिए वह विदेशी हैं। उधर, आनंद की पत्नी अरुणा आनंद का कहना है कि विश्वनाथन आनंद अपनी ट्रेनिंग के लिए स्पेन जरूर जाते रहते हैं, लेकिन वह भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि आनंद का भारतीय पासपोर्ट भी यूनिवर्सिटी को उपलब्ध करवाया जा चुका है।

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