सिरमौर की पंचायतें शराब से मालामाल

नाहन। एक वर्ष में जिला के लोग 30 लाख से अधिक बोतलें दारू की गटक जाते हैं। शराब की प्रतिमाह अढ़ाई लाख बोतल की खपत के कारण  जहां प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिल रहा है, वहीं जिला की ग्राम पंचायतों को भी एक वर्ष में 30.45 लाख रुपयों की आमदनी हुई है। शराब से हुई इस कमाई को जिला के विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। खास तौर से जिला की 56 पंचायतें मालामाल हो गई हैं, जिनमें शराब के ठेके खुले हैं। गौर हो कि प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को शराब की बिक्री पर एक रुपए प्रति बोतल का राजस्व मिलता है। वर्ष 2008-09 में जिला सिरमौर में हुई शराब की बिक्री से करीब 30.45 लाख रुपए ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को मिला है।

प्रदेश सरकार ने 34.45 लाख रुपए की किस्त जिला प्रशासन को भेज दी है। जानकारी के मुताबिक जिला की 56 पंचायतों में शराब के ठेके चल रहे हैं, जबकि 172 पंचायतें ऐसी हैं, जहां पर कोई शराब का ठेका या काउंटर नहीं है। शराब से हुई कुल कमाई में से 80 प्रतिशत उन पंचायतों पर खर्च किया जाएगा, जहां शराब के ठेके चल रहे हैं, जबकि 20 प्रतिशत राशि अन्य पंचायतों के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई 30.45 लाख में से 16.97 लाख रुपए जिला की 56 पंचायतों पर खर्च होगी, जिनमें शराब के ठेके चल रहे हैं। नगर परिषद नाहन व पांवटा साहिब को क्रमशः 3.09 व 3.34 लाख रुपए मिले हैं, जबकि नगर पंचायत राजगढ़ को 96 हजार तथा जिला की 172 पंचायतें, जिनमें शराब के ठेके नहीं हैं, को 6.09 लाख रुपए वितरित किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार नियमानुसार शराब की बिक्री पर एकत्रित लाइसेंस फीस का 50 प्रतिशत एक रुपए प्रति बोतल ग्राम पंचायत तथा स्थानीय निकायों को आबंटित किया जाता है।

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