सूफी गायक से एक मुलाकात..

पिछले दिनों मिंजर में जाना हुआ…। मेले की भीड़ और आपा-धापी के बीच एक शख्सियत से मेरी अजीब सी मुलाकात हुई। एक छोटा सा पीसीओ और उसमें धंसे अपनी बारी का इंतजार करते कितने ही लोग। उन्हीं के बीच मिले,अपनी ‘अल्ला हू’ कव्वाली से चर्चित शैलेंद्र अत्री। सूफियाना लुक लिए हुए उस कलाकार के अंदर कुछ तो ऐसा था कि हमने अगले दिन उन से मिलने का समय ले लिया। अपने संगीत के सफर का कोई ऐसा लम्हा जो याद रह गया हो, बताएं। वह शिमला का समर फेस्टिवल था। मेरा प्रोग्राम था और उसी दौरान मेरे जीजा जी एक्सपायर हुए। मेरा दिल उदास था, मैंने प्रोग्राम किया (नीं मैं जाना जोगी दे नाल) हालांकि ऐसे मुश्किल वक्त में मैंने इसे परफार्म किया,पर इसे काफी तारीफ मिली। मेरी ओर से यह नुसरत फतेह अली साहब को समर्पित था। वह दिन मंै आज तक नहीं भूल पाया। सूफियाना संगीत के अलावा कला के और किस क्षेत्र में आपकी रुचि रही? मैंने टीवी सीरियल में भी काम किया है। डीडी वन के एक सीरियल, ‘हम साथ-साथ हैं’ में मैंने मौलवी का रोल किया था। वैसे मुझे विलेन के रोल पसंद हैं और मैं ऐसे ही रोल करना चाहता हूं विलेन ही क्यों? फिल्म इंडस्ट्री में विलेन हैं ही कहां? इसलिए इसमें ज्यादा स्कोप हैं। मूल रूप से आप कहां के हैं और इस तरफ रुझान कैसे हो गया? मेरी पैदाइश गिरिगंगा नाहन की है। छोटा था तो राम लीला देखने जाया करता था। रावण का किरदार मुझे बेहद पसंद था। लौट कर मां को बताया तो उन्होंने हंस कर कहा तू तो खुद रावण है। वहीं से मेरे मन में विलेन बनने की चाहत ने जन्म लिया। मैंने माडलिंग के शोज किए। 2005 में ऑडिशन हुआ और मेरा सिलेक्शन एक फिल्म में विलेन के तौर पर हुआ। यह हिमाचल की पहली हिंदी फिल्म थी, ‘तुम बिन क्या जीना’ इतनी सारी ख्वाहिशों को परवान चढ़ाने के लिए ट्रेनिंग कहां से ली? कहीं से नहीं… मेरा कोई ट्रेनर नहीं है। यह सब मुझे गॉडगिफ्टेड है जिंदगी की कोई ऐसी घटना जो आपको संजीदा भी करती है और उसे याद कर हंसी भी आती है? हंसी तब आती है जब आप एक सही और नेक काम कर के आए हों और घर वाले आपका यकीन ही न करें। मेरा घर का नाम लकी है। यह टुटू की घटना है। उस समय कारगिल मोटरसाइकिल रैली चली हुई थी। एक सवार खाई में गिर गया। मैं शॉप से लौट रहा था मैं खाई में उतरा और उसे ऊपर ले आया। उसे अस्पताल भिजवाने के बाद घर पहुंचा। मेरे कपड़ों में मिट्टी और खून लगा हुआ था। देखते ही मेरा भाई चीखा-ममी, लकी किसी को मार कर दबा कर आया है। खिल-खिल हंसी… और हंसी हमारे होठों पर भी आ गई।

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