सेब, सड़क व चौपाल हादसा हावी

सुनील शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के शुभारंंभ पर सेब बागबानी और सड़क अव्यवस्था का मुद्दा छाया रहा। यही नहीं चौपाल बस हादसे को लेकर भी विपक्ष की तरफ से विधायक कौल सिंह ठाकुर ने सत्तापक्ष को घेरने का प्रयास तो किया, मगर परिवहन मंत्री द्वारा दिए गए जवाब के बाद विपक्ष संतुष्ट दिखा। गंगूराम मुसाफिर द्वारा प्रश्नकाल के दौरान उठाए गए सवाल पर मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि सरकार बागबानों की हर समस्या के प्रति गंभीर है। उन्होंने सेब कमीशन के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बावजूद दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के शीला दीक्षित सरकार गंभीर नहीं है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों से आग्रह किया कि वे भी पार्टी स्तर पर बागबानों से कमीशन वसूलने संबंधी मुद्दे को उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को छह से दो फीसदी कमीशन वसूलने की शिकायतें मिली हैं। राज्य सरकार मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के ध्यान में ला रही है। प्रयास होगा कि राजनीतिक, सरकारी स्तर पर इस मामले को सुलझाया जाए। अंतरराज्यीय मसलों की फेहरिस्त में बीबीएमबी प्रोजेक्टों में हिस्सेदारी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अभी तक भी केंद्र सरकार कोई सकारात्मक निर्णय नहीं ढूंढ सकी है। दो बार इस मसले पर मुख्यमंत्री केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को पत्र लिख चुके हैं। संयुक्त सचिव स्तर की दो बार बैठकें हो चुकी हैं। यदि अभी भी यह मामला नहीं सुलझता है, तो दोबारा से इसे सुप्रीम कोर्ट में ले जाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि चंडीगढ़-बद्दी मार्ग तैयार हो चुका है। इस पर तीन पुल भी बना लिए गए हैं। इससे चंडीगढ़ की दूरी 22 किलोमीटर कम होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के आजादपुर इलाके में किसान भवन दो करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। वर्ष 1998-99 में इसका भूमि पूजन पूर्व भाजपा सरकार व दिल्ली में सत्तासीन रही भाजपा सरकार के दौरान किया गया था। एचपीएमसी इसे संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आनंदपुर-नयनादेवी रज्जूमार्ग की लंबाई 3.6 किलोमीटर होगी। इस पर 64.89 करोड़ का खर्च आएगा। हिमाचल पर्यटन विभाग व पंजाब पर्यटन विभाग के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर समझौता हस्ताक्षर किए जाने हैं। विपक्ष की नेता विद्या स्टोक्स व विधायक कुलदीप सिंह पठानिया द्वारा सेब व सड़क अव्यवस्था को लेकर लाई गई अल्पकालीन चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सड़क नेटवर्क को बढ़ाने व गुणवत्तायुक्त सड़कें प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। प्रदेश में वन भूमि की समस्या के चलते 18 पंचायतें ही सड़क कनेक्टिविटी से नहीं जोड़ी जा सकी हैं। अन्य में मोटर योग्य सड़कों का प्रावधान किया जा चुका है।

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