सोलन में भगवा ब्रिगेड का जलवा

मुकेश कुमार, सोलन

सोलन जिला के पांच महाविद्यालयों के छात्र संघ के चुनावों में मत पेटियों में बंद प्रत्याशियों के भाग्य का पिटारा खुल गया है। बीते छात्र संघ के चुनावों की अपेक्षा इस बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सीटों की संख्या में सात अंकों का इजाफा हुआ है, जबकि एनएसयूआई को जिला में छह सीटों का नुकसान हुआ है। सोलन जिला में सोलन संस्कृत कालेज व डिग्री कालेज में अभाविप ने पूरी तरह एनएसयूआई का सूपड़ा साफ करके शेष तीनों महाविद्यालयों में अभाविप की लगातार हो रही फजीहत से इस संगठन को बचाया है। प्रमुख पहलू यह है कि अर्की, सुबाथू व नालागढ़ कालेज में बीते वर्ष की भांति एनएसयूआई के दुर्ग को अभाविप नहीं हिला सकी तथा सत्तापक्ष का लाभ भी अभाविप को न मिल सका। इस बार के परिणामों में संस्कृत कालेज में चारों ओहदे अभाविप, सोलन डिग्री कालेज में महासचिव का पद एसएफआई को तथा शेष तीनों पद अभाविप को, अर्की में प्रधान, उपप्रधान व संयुक्त सचिव का पद एनएसयूआई तथा महासचिव का पद अभाविप को, नालागढ़ कालेज में उपाध्यक्ष का पद अभाविप को तथा शेष तीनों पद एनएसयूआई के खाते में गए हैं। सुबाथू महाविद्यालय में हमेशा की तरह प्रधान, उपप्रधान व महासचिव का पद एनएसयूआई ने झटका है तथा संयुक्त सचिव पर अभाविप का प्रत्याशी चुनकर आया है। कुल मिलाकर बीते वर्ष जिले के पांचों महाविद्यालयों में एनएसयूआई को 15 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी तथा अभाविप के खाते में मात्र तीन सीटें आई थीं।  सोलन में इस बार एनएसयूआई के दोफोड़ होने का पूरा लाभ अभाविप ने उठाया। पूरे जिले में पूरी 20 सीटों में से 10 सीटें अभाविप ने झटकी हैं तथा एनएसयूआई घटकर नौ सीटों पर आ गई है। बीते वर्ष दो सीटों के मुकाबले में सोलन में सिर्फ एक सीट तक एसएफआई का आंकड़ा सिमट गया है। छात्र संघों के इस चुनाव को यदि राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ा जाए, तो जिला के सोलन निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय विधायक व स्वास्थ्य मंत्री की युवा वर्ग पर पकड़ उजागर हुई है।

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