हिमाचली छात्रों को छात्रवृत्तियां

चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों सोलन, शिमला, बिलासपुर, किन्नौर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, लाहुल-स्पीति, मंडी, सिरमौर और ऊना से आने वाले छात्रों को लाभान्वित करने के लिए महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के प्रधान तरसेम गर्ग ने वर्तमान सत्र 2010-11 के लिए अनेक छात्रवृत्तियां देने की पहल की है। इस योजना के अंतर्गत प्रथम प्रकार की छात्रवृत्ति शिक्षण शुल्क शतप्रतिशत छूट के रूप में हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक जिला से सर्वोत्तम स्थान ग्रहण करने वाले एक छात्र और एक छात्रा को महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन के स्कूल आफ इंजीनियरिंग एवं तकनीकी, स्कूल आफ व्यवसाय एवं प्रबंधन, स्कूल आफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन में से किसी भी कोर्स में दाखिला लेने पर प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार दूसरे प्रकार की छात्रवृत्ति शिक्षण शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट के रूप में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले अभ्यर्थियों में से प्रत्येक जिला से द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले एक छात्र और छात्रा को प्रदान की जाएगी, जिन्हांेने विभिन्न कोर्सों में दाखिला लेना है। उक्त योजना के तहत महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय ने सोलन के अंतर्गत अध्ययन करने वाले छात्रों को लाभान्वित करने के लिए छात्रवृत्तियां प्रारंभ करते हुए श्री गर्ग ने यह घोषणा भी की कि वे प्रदेश के लोगों की सेवा करने के लिए कृतसंकल्प हैं, जिसकी घोषणा उन्होंने पिछले वर्ष महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन के शिलान्यास व हिमाचल प्रदेश में स्ववित्तपोशी मेडिकल कालेज प्रारंभ करते हुए की थी। इस मेडिकल कालेज का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट जो अब सुप्रसिद्ध एमएम एजुकेशन ट्रस्ट है, ने ग्रामीण लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलवाने की यात्रा 1995 में मुलाना में एमएम इंजीनियरिंग कालेज स्थापित करके आरंभ की थी। इसे बाद में भारत सरकार द्वारा सेक्शन तीन यूजीसी एक्ट-1956 द्वारा बहुसंकाय डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इसमें मेडिकल सांइस, डेंटल साइंस, नर्सिंग, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी, फिजियोथैरेपी, फार्मेसी, मैनेजमेंट, कम्प्यूटर, विधि, शिक्षण, होटल मैनेजमेंट आदि के स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्सों के साथ एमफिल, पीएचडी एवं अनुसंधान कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस स्वप्न की परिणति उत्तर भारत के विभिन्न स्थानों पर भौतिक संस्थानों के रूप में साकार हो रही है।

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