हिमाचली वैज्ञानिक को अमरीका का सलाम

शिमला। विश्व विख्यात वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन की ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ व ‘मास एनर्जी कंजर्वेशन’ को हिमाचली वैज्ञानिक अजय शर्मा की चुनौती गंभीरता से ली जाने लगी है। प्रसिद्ध ‘अमरीकन इंस्टीच्यूट आफ फिजिक्स’ ने श्री शर्मा के दावे को पुख्ता पाते हुए उनके सिद्धांत से सहमति जताई है। यही वजह है कि इंस्टीच्यूट के सौजन्य से प्रकाशित होने वाले रिसर्च जर्नल ‘फिजिक्स ऐसेज’ में अजय शर्मा का 50 पृष्ठों का विस्तृत शोधपत्र प्रकाशित करने को हरी झंडी दिखा दी गई है। इस संबंध में विशेषज्ञ डा. स्टीफन क्राथर्स ने जर्नल एडीटर डा. इमिलो पैनारेला से सिफारिश की है। उल्लेखनीय है कि अजय शर्मा पिछले 28 वर्षों से आइंस्टीन के विख्यात सिद्धांत ई=एमसी2 को चुनौती देकर उसमें सुधार प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके अनुसार यह फार्मूला अल्प गणनाओं पर आधारित है और विस्तृत प्रयोगों के बाद यह डीई=एसी2डीएम होना चाहिए। अजय शर्मा का कहना है कि आइंस्टीन के सिद्धांत के मुताबिक अगर कोई मोमबत्ती जलाई जाए, तो वह निरंतर जलती रहनी चाहिए और उसका वजन भी बढ़ना चाहिए, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता। विज्ञान संबंधी मुद्दे पर गहन पकड़ रखने वाले अजय शर्मा अपने सिद्धांत की मान्यता के लिए अरसे से लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें मलाल है कि सरकार ने उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। हालांकि अजय शर्मा ने सांसद अनुराग ठाकुर का धन्यवाद किया है कि उन्होंने यह मुद्दा केंद्रीय विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी विभाग के साथ उठाया है। अजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2002 में मुख्यमंत्री ने शोधपत्र मूल्यांकन हेतु हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय भेजे थे, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। 2008 में विश्वविद्यालय ने इस विषय पर सेमिनार के लिखित आदेश भी दिए थे, पर ये प्रयास भी सिरे नहीं चढ़ पाए। अजय शर्मा ने पुनः वाइस चांसलर से आग्रह किया है कि इस विषय पर सेमिनार करवाने के आदेश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि सेमिनार में फिजिक्स, गणित, रसायन विज्ञान के कालेज, विश्वविद्यालय स्तर के जानकारों को भी शामिल किया जाना चाहिए। अजय का शोध वेबसाइट  ड्डद्भड्ड4शठ्ठद्यद्बठ्ठद्ग.ह्वह्य पर उपलब्ध है।

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