हिमाचल को मेजर समीर कटवालपर नाज

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, संधोल

देवभूमि को भारत मां पर कुर्बान मेजर समीर कटवाल की शहादत पर नाज है। मंडी जिला के संधोल में जन्मे मेजर समीर ने असम में दिमासा उग्रवादियों से लोहा लेते हुए शहादत पाई थी। कुमाऊं रेजिमेंट में सर्वश्रेष्ठ कमांडो का खिताब पाने वाले मेजर समीर फुटबाल व बास्केटबाल के भी अच्छे खिलाड़ी थे। समीर का जन्म 25 जुलाई 1974 को संधोल में रविंद्रपाल सिंह और शीला कटवाल के घर हुआ।  दो बहनों के इकलौते भाई समीर बचपन से साहसी व होनहार थे। समीर की स्कूली शिक्षा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) खड़कवासला व भारतीय मिलिट्री अकादमी देहरादून में हुई। वर्ष 1995 में मेजर समीर की पहली पोस्टिंग 21 कमाऊं रेजिमेंट में पालमपुर (कांगड़ा) में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट में हुई। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सर्वश्रेष्ठ कमांडो डैगर का खिताब पाया। फुटबाल-बास्केटबाल का बेहतर खिलाड़ी होने के कारण समीर रेजिमेंट के जवानों और अफसरों में लोकप्रिय थे। वर्ष 1999 में उनकी ड्यूटी असम में थी। इसी दौरान 28 अगस्त के दिन असम के जंगलों में दिमासा उग्रवादियों के साथ समीर व साथियों की मुठभेड़ हुई, जिसमें बहादुरी से दुश्मनों का मुकाबला करते हुए मेजर समीर कटवाल वीरगति को प्राप्त हुए। मेजर समीर के पिता रविंद्र कटवाल ने बताया कि उन्हें फख्र है कि उनका बेटा देश के काम आया। दूसरी ओर माता शीला कटवाल का कहना है कि जिगर के टुकड़े को खोने का गम जरूर है, लेकिन वह खुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि समीर की बहादुरी पर आज समूचे हिमाचल को फख्र है। समीर के पिता रविंद्र कटवाल पर्यावरण विभाग से अतिरिक्त महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

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