हिमाचल में तबाही की बारिश

शिमला। गुरुवार रात से जारी झमाझम बारिश प्रदेश के लिए आफत बनकर आई। जगह-जगह ल्हासे गिरने से सड़कें बंद हो गईं व बिजली-पानी ने भी हिम्मत हार दी। हद तो तब हो गई, जब बारिश का कहर लोगों के आशियानों तक पहुंच गया। नतीजतन कई लोगों को बिना छत के रात गुजारने पर विवश होना पड़ा। बारिश ने सबसे ज्यादा कांगड़ा व मंडी जिलों में कहर बरपाया, जिसके चलते देर रात को ही राष्ट्रीय राजमार्ग ठप हो गए। परिणामस्वरूप लोगों को भारी बारिश में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार दोपहर तक बारिश जारी रहने से लोगों की जान आफत में रही। जानकारी के अनुसार करीब 32,235 हेक्टेयर नकदी फसलें बारिश से बर्बाद हो गई हैं, जिनमें मुख्यतः शिमला मिर्च, बींस, मटर, टमाटर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त धान की फसल भी बर्बाद हो गई है। गुरुवार देर रात से धर्मशाला-शिमला हाई-वे पुराना कांगड़ा में ल्हासे गिरने से अवरुद्ध हो गया, जो शुक्रवार को भी खुल नहीं पाया। वहीं निकटवर्ती गांवों में नालों का रुख पलटने से पानी लोगों के घरों में जा घुसा, जिससे लाखों का नुकसान हुआ। वहीं पालमपुर में भारी बारिश से मलबा लोगों के घरों में घुस आया। आईपीएच के रेस्ट हाउस को खतरा पैदा हो गया है। वहीं कई दुकानों में पानी घुसने से सामान खराब हो गया है। ल्हासों से बैजनाथ, गोपालपुर-लाहला, लोहना-कुल्हानी, डाढ-मलां मार्ग अवरुद्ध रहे। परौर-धीरा-नौरा सड़क करीब आठ घंटे अवरुद्ध रही। अंबाड़ी में राजकीय प्राथमिक स्कूल का भवन क्षतिग्रस्त हो गया। बच्चों को छुट्टियां होने से हालांकि कोई जान-माल की हानि नहीं हुई। नूरपुर, देहरा में भी खासा नुकसान हुआ। मंडी में सात भवन भू-स्खलन  से जमींदोज हो गए। सरकाघाट में एनएच करीब सात घंटे तक बंद रहा। जंजैहली में ल्हासा गिरने से भी जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। जगतसुख में बाढ़ ने लाखों गर्क किए, वहीं उरला, लडभड़ोल में भी तबाही मची। शिमला में कोटनाला के पास 500 मीटर सड़क का नामोनिशान ही मिट गया। सोलन-सिरमौर में करीब 11 करोड़ की चपत लगी।

You might also like