हिमाचल में ‘लिटिगेशन फ्री’ गांव

त्वरित न्याय की वकालत का श्रेय हिमाचल ले सकता है और यह सब हाई कोर्ट के मुख्याधीश कुरियन जोसफ की बदौलत हो रहा है। कुछ दिन पहले ई कोर्ट के जरिए पारदर्शी न्याय प्रणाली का शुभारंभ करने के बाद, अब प्रदेश के हर जिला में एक गांव को विवादमुक्त करने का संकल्प लिया जा रहा है। केरल की तर्ज पर शुरू हो रहा यह अभियान हिमाचली मानसिकता में बदलाव ला सकता है। जहां तक केरल में लिटिगेशन फ्री गांव की अवधारणा का संबंध है, राज्य के चेरियानाडु ग्राम पंचायत में 1988 से जो प्रयास शुरू हुआ, वह अब सामाजिक न्याय व्यवस्था का अनुपम उदाहरण साबित हुआ है। गांव में पहले दो सालों में ही 160 मामलों को रफा-दफा किया जा सका और इस तरह समाज ने कानूनी पंेचों में फंसे विवादों से मुक्त रहना सीख लिया है। हिमाचल का
जिक्र करें, तो यहां जिस तरह सामाजिक टकराव का माहौल, कानूनी अखाड़ों में पनप रहा है उससे सामान्य जीवन ही प्रभावित हो रहा है। कानूनी दांव-पेंच में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब परिवार होते हैं और इस तरह जिरह के लंबे दौर, न्याय की प्रतीक्षा को कष्टप्रद बना देते हैं। ऐसे में ‘लिटिगेशन फ्री गांव’ की दिशा में हमारे कदम, सौहर्दपूर्ण कानून व्यवस्था के नजदीक पहुंचेंगे। केरल में ऐसे गांवों के मामले कानूनविद, शिक्षाविद सामाजिक कार्यकर्ता व पंचायत सदस्य मिलकर देखते हैं और इसी के अनुरूप आम सहमति से फैसला होता है। हिमाचल में विवाद मध्यस्थता केंद्रों के जरिए भी ऐसे लक्ष्य देखे जा रहे हैं। इसी माह शिमला में प्रदेश के करीब दो सौ अधिवक्ताओं को प्रशिक्षित करके, विवाद मध्यस्थता केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इससे पूर्व हाई कोर्ट में इस तरह का केंद्र स्थापित हो चुका है। प्रदेश में यूं तो जनसंख्या के हिसाब से न्यायाधीशों की नियुक्ति दर, राष्ट्र की औसत से बेहतर है फिर भी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप ग्रामीण अदालतों का इंतजार किया जा रहा है। ऐसा समझा जा रहा है कि केंद्रीय
कानून मंत्रालय शीघ्र ही ग्राम न्यायालय अधिनियम पेश करके ग्राम न्यायालयों की स्थापना कर सकता है। त्वरित न्याय
की दिशा में राष्ट्रीय प्रयास जो भी हों, लेकिन हिमाचल में न्याय प्रणाली की बेहतरी के लिए कुछ सार्थक कदम अनिवार्य
हैं। अदालतों में वर्तमान कार्य बोझ घटाने के अलावा यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अधिवक्ता कानूनी प्रक्रिया के पचड़े के बाहर लोगों की आपसी समझौते के लिए प्रेरित करें। इस दिशा में विवाद मध्यस्थता केंद्र साहसिक प्रयत्न करके आम जनता को पेचीदगियों से बचा सकते हैं। न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने हिमाचल में कानूनी प्रक्रिया को सरल व सामान्य बनाने की दिशा में सराहनीय फैसले लिए हैं, जबकि न्याय के व्यावहारिक पक्ष को भी नई परिभाषा दी है। हाई कोर्ट में लंबित 45 हजार मामलों के त्वरित निष्पादन की दिशा में अलग-अलग बैंच की स्थापना एक कारगर उपाय होगा। खास तौर पर प्रशासनिक या कर्मचारी मामलों को अगर अलग से बैंच स्थापित की जाती है, तो इससे न्याय की परिपाटी और मजबूत होगी। बहरहाल ग्रामीण अंचल तक कानून को परिभाषित करते न्यायमूर्ति जोसफ के प्रयास, एक राहत भरा पैगाम है।

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