200 कर्मियों को डीए किस्त जारी

भूपेंद्र ठाकुर, सोलन

नगर परिषद के 200 कर्मियों को अगस्त माह से डीए की पहली किस्त जारी कर दी गई है। परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। परिषद के इस निर्णय से करीब दो लाख रुपए का आर्थिक बोझ बढ़ेगा। गुरुवार देर शाम नगर परिषद की बैठक अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मुख्य रूप से बैठक के दौरान परिषद के कर्मियों को डीए की आठ प्रतिशत किस्त जारी किए जाने का निर्णय बैठक के दौरान लिया गया है। अगस्त माह से यह किस्त जारी कर दी जाएगी।  सितंबर माह में मिलने वाले वेतन के साथ यह किस्त कर्मियों को मिलेगी, जबकि इसके अलावा बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि रेहड़ी मालिकों के दोहरे अधिकार प्रदान किए जाएंगे, जिन रेहड़ी मालिकों को नगरपालिका बाजार में दुकानें नहीं मिलती हैं, वे शहर में निर्धारित स्थानों पर रेहड़ी लगा सकते हैं, लेकिन जिन रेहड़ी मालिकों को खुली बोली के माध्यम से दुकानें मिल जाएंगी, उनके रेहड़ी लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। अग्रिम राशि जमा करवाए जाने के लिए इन रेहड़ी मालिकों को दुकानें दे दी जाएंगी।   नगर परिषद को अब तक करीब 30 आवेदन दुकान लेने के लिए मिल चुके हैं। परिषद द्वारा नगरपालिका बाजार में करीब 40 दुकानें बनाई गई हैं। जल्द ही आवेदन पूरे होने के बाद परिषद द्वारा इन दुकानों की नीलामी के लिए तारीख निर्धारित की जा रही है। वहीं नगर परिषद की बैठक में कांग्रेसी पार्षदों ने खूब हंगामा भी किया, लेकिन भाजपा पार्षद कांग्रेसी पार्षदों पर भारी पड़े।  कंजरवेंसी टैक्स के मुद्दे को कांग्रेसी पार्षद मजबूत तरीके से बैठक में नहीं उठा पाए। माहौल गरमाता देख नगर परिषद अध्यक्ष ने यह कह कर बैठक स्थगित कर दी कि बाद में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। इस सबके चलते कांग्रेसी पार्षदों द्वारा बनाई गई रणनीति विफल हो गई। वहीं कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि कंजरवेंसी टैक्स पर बैठक के दौरान व्यापक चर्चा नहीं हो पाई है, जिसके कारण अब आगामी रणनीति तय की जा रही है। नगर परिषद अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर का कहना है कि कांगे्रेसी पार्षद कंजरवेंसी टैक्स पर बेवजह शोर मचा रहे हैं।  परिषद ने अपनी मर्जी से यह टैक्स निर्धारित नहीं किया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार ही टैक्स वसूल किया जा रहा है। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष की गलती के कारण परिषद  को कंजरवेंसी टैक्स पर करोड़ों का चूना लगा है, जिसे वर्तमान में सुधारा गया है।

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