200 साल बूढ़े रिज पर और गहराई दरार

शिमला। शिमला का ऐतिहासिक रिज मैदान आज अपनी उम्र पूरी कर चुका है। इसका जीता-जागता उदाहरण रिज पर पड़ रही दरार है। यह दरार दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही है। ब्रिटिश शासन काल में स्थापित किए गए रिज मैदान को आज दो सौ से भी अधिक साल का समय गुजरने को आया है। लगातार बढ़ती आबादी, रिज पर सरपट दौड़ते वाहनों और यहां आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों ने रिज के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। पर्यटकों में सदा आकर्षण का केंद्र रहे रिज मैदान पर पड़ी गहरी लकीरें इसकी सुंदरता को बदनुमा दाग तो लगा ही रही हैं। रिज मैदान के रखरखाव की जिम्मेदारी यूं तो नगर निगम शिमला की बनती है, लेकिन इस पर दिन-ब-दिन बढ़ते दबाव व सिंकिंग जोन में आने के कारण निगम को इसे बचा पाना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। गेयटी थियेटर के ठीक सामने रिज मैदान का एक हिस्सा बहुत झुक गया है। राज्य भू-वैज्ञानिक अरुण ने बताया कि पहले भी रिज धंसने की घटना घट चुकी है। इसको बचाने के लिए उन्होंेने रिटेनिंग वाल स्थापित किए जाने का एक सर्वे किया था, जिसमें उन्होंने जमीन के अंदर चट्टान की खोज की थी। इसकी रिपोर्ट उन्होंने नगर निगम शिमला को सौंपी। उन्होंेने कहा कि निगम को चाहिए कि वह यहां पर रिटेनिंग वाल स्थापित करे। नगर निगम आयुक्त एएन शर्मा ने कहा कि भू-वैज्ञानिक ने उन्हें चट्टान होने की तो सूचना दी थी, लेकिन निर्माण कार्य किए जाने पर कुछ नहीं कहा। निगम फिर से सर्वे करवा कर शीघ्र बचाव कार्य शुरू कर देगा। उधर, भले ही रिज मैदान पर दरारें गहरी होती जा रही हों, लेकिन इससे रिज पर स्थित शहर के सबसे बड़े पानी के टैंक को कोई खतरा नहीं है। निगम का दावा है कि यह टैंक पूरी तरह सुरक्षित है।

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