88 सड़कों को मंजूरी

सुनील शर्मा, शिमला

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक साल से लंबित पड़ी प्रदेश की 88 सड़कों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। बावजूद इसके अभी 178 सड़कें स्वीकृति के इंतजार में हैं। ऐसी सभी सड़कों का निर्माण नाबार्ड, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनाओं के तहत किया जाना है। ये सड़कें मंडी, बिलासपुर, सिरमौर, शिमला, सोलन और चंबा में तैयार की जानी हैं। सूचना के मुताबिक  लोक निर्माण विभाग ने इन सड़कों में से 167 की विस्तृत परियोजना तैयार कर ली है, मगर वन संरक्षण अधिनियम के कड़े मापदंडों के कारण यह कार्य रुका पड़ा है। लोक निर्माण विभाग ने इन सड़कों के निर्माण के लिए 10.30 करोड़ की राशि वन विभाग को जारी कर दी है।

राज्य सरकार ने इस वित्त वर्ष में एनपीवी यानी नेट प्रेजेंट वैल्यू के तहत 13.55 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वर्ष 2009-10 में यह दर 26.02 करोड़ थी। राज्य सरकार ने एनपीवी को परियोजना लागत में ही शामिल करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया था, मगर केंद्र ने इस पर सहमति नहीं दी। अब नाबार्ड ने इस राशि को परियोजना लागत में शामिल करने की सहमति दी है, वहीं राज्य सरकार भी हर वर्ष अपने तौर पर यह राशि राज्य के वजट में प्रदान करती है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 178 में से 60 और सड़कों की सैद्धांतिक मंजूरी केंद्रीय मंत्रालय ने प्रदान की है, मगर इन्हें पूरी तौर पर स्वीकृति मिलने में एक-दो माह का वक्त लग सकता है। जानकारों की राय में यदि राज्य को केंद्रीय वन मंत्रालय सड़क निर्माण के कार्यों में वन संरक्षण अधिनियम के तहत छूट प्रदान करे, तो इस कार्य में आने वाली दिक्कतें कम की जा सकती हैं। पिछले वर्ष भी करीब 102सड़कों का निर्माण इसी वजह से लटक गया था।

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