अमर-जया केस में एटार्नी जनरल तलब

एजेंसियां, नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने समाजवादी पार्टी से निष्कासित राज्यसभा सदस्य अमर सिंह और लोकसभा सदस्य जयाप्रदा की याचिकाओं पर एटार्नी जनरल से विचार मांगे हैं। श्री सिंह और सुश्री जयाप्रदा ने अपनी याचिकाओं में निष्कासन के बावजूद पार्टी व्हिप पर अमल करने की बाध्यता संबंधी उच्चतम न्यायालय के 1996 के फैसले पर सवाल खडे़ किए हैं। इससे पहले सपा के पूर्व महासचिव श्री सिंह की ओर से मामले की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने दलील दी कि दल-बदल कानून की धाराओं के तहत पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद कोई सांसद या विधायक निर्दलीय सदस्य की श्रेणी में आ जाता है, ऐसी स्थिति में पार्टी व्हिप पर अमल करने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन इस बारे में उच्चतम न्यायालय का 1996 का फैसला विरोधाभासी हैं। श्री साल्वे ने कहा कि इस फैसले के अनुसार निष्कासित सांसद या विधायक को भी पार्टी व्हिप का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को संशोधित करने और ऐसे मामलों में दल-बदल कानून की संबंधित धाराओं को पूर्ववत अमल में रखने की आवश्यकता है। इसके बाद खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट को इन याचिकाओं की प्रतियां एटार्नी जनरल को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। न्यायालय ने एटार्नी जनरल को आगामी नौ नवंबर को इस बाबत अपने विचार रखने को कहा है। अभिनय की दुनिया से राजनीति के मैदान में उतरीं सुश्री जयाप्रदा और श्री सिंह ने न्यायालय से यह जानना चाहा है कि क्या पार्टी से निष्कासन के बाद भी पार्टी व्हिप पर अमल करना उनकी बाध्यता है। उत्तर प्रदेश से निर्वाचित श्री सिंह और इसी राज्य के रामपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहीं सुश्री जयाप्रदा का कहना है कि दल-बदल कानून के प्रावधान उन सांसदों और विधायकों पर लागू होते हैं, जिन्होंने खुद पार्टी छोड़ी है। यह प्रावधान पार्टी से निष्कासित सांसदों और विधायकों पर लागू नहीं किए जा सकते।

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