आखिर कब तक चलती रहेगी अव्यवस्था

– प्रेमपाल महिंद्रू, नाहन

जिला मुख्यालय होने के बावजूद भी नाहन शहर में अनेक समस्याएं अपना मुंह बाए खड़ी रहती हैं। अहम सवाल तो तब उठता है, जब स्थानीय जनता चुप होकर इन समस्याओं को सहन करती रहती है। न जनता आगे आती है, न यहां पर स्थापित अनेक संस्थाएं। जिला प्रशासन खामोश होकर लापरवाह बना रहता है। पूरे शहर की सड़कें गांव की पगडंडियों से भी बदतर हालत में है। क्या इन्हें संवारना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली से नहीं जुड़ा है? क्या इन्हें संवारने के लिए लोगों को चंदा इकट्ठा कर नगर प्रशासन को देना होगा कि लो ये चंदा और सड़कों की हालत को ठीक करो। शहर में गंदगी का नजारा देखने लायक है, जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आते है। यहां की जनता भी इस गंदगी में रहने की आदि हो चुकी है। नगरपालिका की कार्य क्षमता समाप्त हो चुकी है। शहर अरसे से चिडि़याघर बना हुआ है। आवारा पशुओं की आवाजाही ने पूरे शहर में कब्जा जमाया हुआ है। दुधारू पशुओं को लोग दूध निकाल कर शहर की सड़कों पर खदेड़ देते हैं। आवारा पशु दिन-रात शहर की सड़कों गलियों की अपने गोबर से लीपापोती करते रहते है। हर नस्ल के तथा तमाम बीमारियों से ग्रस्त कुत्ते शहर के कोने-कोने में दुबके अपनी बोली में रोते रहते हैं, जिसे समझने वाला शहर में कोई नहीं। पालतू सुअर शहर के 13 वार्डों के चक्कर लगाकर ही रात को अपने ठिकानों पर पहंुचते हैं। शहर में वर्षों से चली आ रही पीने के पानी की किल्लत ज्यों की त्यों है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह है। समस्या का कोई समाधान निकालना उनके बूते से बाहर हो चुका है। शहर की पार्किंग समस्या बढ़ चुकी है। पार्किंग स्थलों पर लोग अपने वाहन कम खड़े करते हैं और अवैध पार्किंग पर ही भरोसा करते है। नशे का व्यापार जोर-शोर से चल रहा है, जिसके चलते युवा वर्ग नशे में धुत्त अपने वाहन पूरी रफ्तार से भगाते हैं, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं। आखिर कब तक चलता रहेगा ये सब। कब सुधार होगा शहर की व्यवस्थाओं का या ऊपर वाले के रहमो-करम पर ही रहेंगे, यहां के लोग, यहां की जनता।

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