चांद के दीदार को दिनभर इंतजार

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, मंडी

पति की दीर्घ आयु की कामनाएं लिए महिलाओं ने दुल्हन की तरह शृंगार किया और उसके बाद आसमां में चमके चांद के दर्शन कर अपने चांद की सलामती को पूजा-अर्चना की। आधुनिक समाज में भी करवाचौथ व्रत की वे परंपराएं कायम रहीं, जो सतयुग के समय में वर्णित की जाती थीं। सुहागिन महिलाओं ने मंगलवार सुबह से ही व्रत की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके लिए महिलाओं ने घर पर सजने-संवरने के अलावा ब्यूटी पार्लरों का भी सहारा लिया। मंडी में भी करवाचौथ का व्रत पूरे पारंपरिक तरीके से मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने मंगलवार के दिन बिना पानी पिए ही भगवान से अपने पति की लंबी आयु की कामना की।

महिलाओं का सजने-संवरने का दौर पूरा दिन चलता रहा और शाम होते ही पूजा का दौर शुरू हो गया। व्रत के दौरान महिलाओं ने जमकर खरीददारी की, जिस कारण मंडी जिला के अंतर्गत आने वाले सरकाघाट, बलद्वाड़ा, पंडोह, नेरचौक, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, पद्धर, करसोग, औट, चच्योट सहित अन्य छोटे कस्बों में महिलाओं की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा थी। पति की लंबी आयु की कामना में किए जाने वाले व्रत के दौरान पतियों ने भी अपनी बीवियों को मायूस नहीं किया और अधिकांश ने उन्हें तोहफे दिए।

करवाचौथ व्रत के दौरान पति की पूजा के साथ ही भगवान से भी इस जोड़ी को सात जन्मों तक पवित्र बंधन में बांधे रखने की प्रार्थना की गई। बहरहाल चांद के दीदार को धरती का चांद सजा रहा। दुल्हन के सोलह शृंगारों में महिलाएं भी चांद की तरह ही नजर आईं और इसी बीच पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला करवाचौथ व्रत पूरा हो गया।

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