सड़क के लिए बिजली का बहिष्कार

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, रामपुर बुशहर

‘सड़क नहीं तो जीवन नहीं’ इस नारे के साथ निरमंड तहसील के सात गांव एक अनोखे आंदोलन पर हैं। सभी गांवों के ग्रामीणों ने सड़क संघर्ष समिति बनाकर प्रशासन के सामने एक नई उलझन खड़ी कर दी है। ग्रामीणों ने अपनी सभी मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण बहिष्कार करने की ठानी है, जिसके तहत सबसे पहले ग्रामीणों ने बिजली का बिल न अदा करने का कदम उठाया है।

सभी ग्रामीणों ने 19 अक्तूबर को बिल की तारीख पर संयुक्त बहिष्कार किया। इसके अलावा ग्रामीणों ने यह भी चेताया कि आने वाले समय में पंचायती राज चुनावों का भी पूरी तरह बहिष्कार किया जाएगा। सड़क संघर्ष समिति के प्रधान हेत राम विष्ट ने कहा कि कई सरकारें आईं व गईं, लेकिन सात गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई, जिस कारण आज भी वे 10 साल पहले जैसी जिंदगी जी रहे हैं। बीमार होने पर ग्रामीणों को कुर्सी में चार आदमियों के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर सड़क नहीं, तो वे पूरी तरह आदिवासी वाला जीवन व्यतीत करेंगे, ताकि प्रदेश सरकार को यह पता चले कि प्रदेश के भीतर कोई एक ऐसा क्षेत्र है, जहां ग्रामीण आदिवासी वाली जिंदगी जी रहे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि अगर सरकार उनकी इस अहम मांग को पूरा नहीं करती, तो वे अपने बच्चों को स्कूल से भी निकाल लेंगे। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे एक पिछड़ी जिंदगी का हिस्सा बनें। इतना ही नहीं सरकार की अन्य सुविधाएं भी पूरी तरह ग्रामीण स्वीकार नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने एक मत में कहा कि जब तक सड़क नहीं, तब तक कुछ नहीं।

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