सिंगल विंडो की राह में बोर्ड घपला रोड़ा

कार्यालय संवाददाता, शिमला

शिक्षा बोर्ड में हुए महाघोटाले की जांच के कारण प्रदेश के उद्योग विभाग की सिंगल विंडो कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही है। शिक्षा बोर्ड का मामला लगातार उलझता जा रहा है और जांच कमेटी जांच में आगे बढ़ रही है। ऐसे में सिंगल विंडो कमेटी की बैठक इस महीने नहीं हो पाएगी। सरकार द्वारा शिक्षा बोर्ड घोटाले की जांच को बनी उच्चस्तरीय कमेटी में निदेशक उद्योग शामिल हैं और उन पर पूरा दारोमदार दिया गया है, क्योंकि वह खुद जांच में उलझे हुए हैं। लिहाजा इससे उद्योग विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। सिंगल विंडो कमेटी की जो बैठक हर महीने की 27 तारीख को होती है, उसके लिए इस दफा दस निवेशकों के आवेदन आए हैं। बिना बैठक के इन्हें भी मंजूरी नहीं मिलेगी। उधर, उद्योग विभाग में जरूरी फाइलें भी लटकी हुई हैं और कई मामलों में निर्णय नहीं हो पाया है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश को मंजूरी देने के लिए सिंगल विंडो कमेटी ही अधिकृत है और पिछले महीने भी इस राज्यस्तरीय कमेटी की बैठक की मात्र औपचारिकता ही पूरी की गई थी, क्योंकि तब केवल एक्सटेंशन के कुछेक मामलों को ही मंजूरी दी गई, जबकि बड़े निवेश के मामले लंबित रखे गए। यदि यह कहें कि दो महीने से बड़े निवेश को हरी झंडी नहीं मिली है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। उद्योग विभाग का काम पिछले चार-पांच महीने से यूं ही चल रहा है। पहले उद्योग विभाग के आयुक्त मनोज कुमार का सरकार ने तबादला कर दिया और इसके बाद करीब दो महीने तक जगदीश शर्मा को इस पद पर अतिरिक्त कार्यभार दिया गया। वह आबकारी एवं कराधान महकमे के आयुक्त हैं और वह भी काफी बड़ा विभाग है। इस वजह से वह भी उद्योग विभाग के काम को तरजीह नहीं दे पाए। फिर सरकार ने ओंकार शर्मा को निदेशक उद्योग का कामकाज सौंपा, लेकिन शिक्षा बोर्ड में घोटाला उजागर होने के साथ ही उन्हें जांच के काम में लगा दिया गया। ऐसे में उद्योग विभाग का काम कई महीनों से प्रभावित हो रहा है। विभाग की सब-कमेटी की बैठक भी पिछले महीने हुई थी, जिसके बाद उक्त बैठक भी नहीं हो पाई। इसमें निवेश के लिए करीब दस आवेदन आए हैं, जिन्हें सब-कमेटी ने मंजूर करके सिंगल विंडो के लिए आगे बढ़ाया है। इन आवेदनों में सबसे बड़ा निवेश 60 करोड़ रुपए का है, जो प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में होना है।

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