10 पशुओं को मिलेंगे पांच लाख

सुरेश कुमार, हमीरपुर

केंद्र सरकार ने दूध गंगा योजना में किसानों को और लाभ पहुंचाने के लिए फेरबदल किया है। अब इस योजना को दूध गंगा योजना की बजाय ‘दूध उद्यमिता विकास योजना’ के नाम से जाना जाएगा। साथ ही किसानों को अब लोन में 25 फीसदी अनुदान भी मिलेगा। फेरबदल के चलते योजना के तहत किसानों के ऋण आवेदन लटक चुके थे, लेकिन उन आवेदनों को स्वीकृति मिलना शुरू हो गई है। सरकार ने इस योजना के तहत किए गए फेरबदल को तत्काल प्रभाव से लागू किया है। इसकी पुष्टि नाबार्ड के सहायक जनरल मैनेजर आरएन नेगी ने की है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए दूध गंगा योजना को लागू किया था। इस योजना के तहत जो सुविधाएं किसानों को उपलब्ध करवाई जा रही थीं, उनसे किसानों को अधिक लाभ नहीं मिल पा रहा था। किसानों को अच्छा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से योजना को जून माह से बंद किया हुआ था। अब यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है तथा इस योजना को ‘दूध उद्यमिता विकास योजना’ के नाम से जाना जाएगा। योजना के तहत किए गए फेरबदल में अब 10 पशुआें की खरीद पर पांच लाख की राशि का ऋण किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा, जो कि पहले तीन लाख रुपए निर्धारित किया गया था। यही नहीं, इस लोन पर किसानों को कैपिटल सबसिडी भी मिलेगी, इसमें सामान्य वर्ग को 25 फीसदी व अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित किसानों को 33.33 फीसदी सबसिडी उपलब्ध होगी। इस सबसिडी की पहले कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी, मात्र निर्धारित लोन की आधी राशि को ब्याज मुक्त रखा गया था। यही नहीं, अब दूध उत्पादन से जुड़ी मशीनरी की खरीद-फरोख्त पर 15 लाख की बजाय 18 लाख राशि का लोन उपलब्ध होगा, जबकि इस उत्पादन से अन्य प्लांट लगाने के लिए 10 लाख की बजाय 12 लाख रुपए की सुविधा उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतर लाभ पहुंचाने के लिए इस योजना में यह फेरबदल किया है। पशुपालन विभाग द्वारा नए निर्देशानुसार प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। नाबार्ड के सहायक जनरल मैनेजर आरएन नेगी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि योजना के तहत आए आवदेन जून माह से लटके पड़े थे अब योजना को तत्काल प्रभाव से नए नियमों के अनुसार लागू किया गया है।

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