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गिरिपार में शुरू हुआ माघी पर्व

पांवटा साहिब –  जिला सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र में बुधवार को मां काली की पूजा-अर्चना के बाद विधिवत माघी पर्व का शुभारंभ हो गया है। बुधवार को विधिवत मां काली के नाम के प्रसाद की कढ़ाई से पर्व का आगाज हो गया है। सुबह ही क्षेत्र के सभी घरों में मां काली के नाम की प्रसाद की कढ़ाही बनाई गई, जिसे माता को अर्पण करने के बाद पर्व का आगाज किया गया। क्षेत्र के बुजुर्गों व मान्यताओं के मुताबिक इस पर्व को मनाने पर मां काली पूरे साल उनकी हर कष्टों से रक्षा करती है। उसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाज से पर्व का आगाज हुआ। कुछ लोगों ने इस मौके पर बकरे काटे तथा कई लोगों ने शाकाहारी तरीके से पर्व को मनाया। जानकारी के मुताबिक गिरिपार क्षेत्र के हाटी द्वारा सदियों से हर वर्ष 11 जनवरी को माघी त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। पर्व को मनाने के लिए क्षेत्र के लोग घरों की ओर पहुंच चुके हैं। अब पूरे माह परंपरा के मुताबिक मेहमाननवाजी का दौर चलता रहेगा। क्षेत्र के कई गांवों में अब एक माह तक रात को पारंपरिक लोक गीतों का गायन भी होता है। यह गायन हर दिन अलग-अलग घरों में किया जाता है। इस पर्व को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह रहता है। यह माघी त्योहार गिरिपार क्षेत्र के तहसील शिलाई, संगड़ाह, राजगढ़, उपतहसील कमरऊ, रोनहाट तथा पांवटा तहसील की आंजभौज की पंचायतों में तो मनाया ही जाता है, लेकिन इसके साथ-साथ ही उत्तराखंड के जौनसार बाबर और शिमला जिले में भी यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

जनजातीय दर्जे के हक को पुख्ता

जिस प्रकार किसी पिछड़े कबीले की अलग दिखने वाली परंपराएं और रीति-रिवाज उन्हें देश के अन्य स्थानों से अलग करती है उसी प्रकार गिरिपार क्षेत्र में भी ऐसे रीति-रिवाज और परंपराएं सदियों से चलते आ रहे हैं जो गिरिपार क्षेत्र के जनजातीय दर्जे की मांग को पुख्ता करती है। इन्हीं में से एक माघी पर्व भी है। यह पर्व क्षेत्र में सदियों से मनाया जाता है। इस प्रकार का पर्व क्षेत्र को एक अलग विशेष पहचान देता है। यह पर्व उत्तराखंड के जौनसार में भी मनाया जाता है जो पहले से जनजातीय घोषित हो चुका है।

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