पंचरुखी में नहीं बना बस स्टैंड

पंचरुखी —  रेल व सड़क मार्ग से जुड़ा राज्य हाई-वे 17 पर स्थापित जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र का मुख्य शहर पंचरुखी आज भी दुर्दशा के आंसू बहा रहा है। मात्र चार से पांच खोखानुमा दुकानों से शुरू हुआ यह शहर आज 500 छोटी-बड़ी दुकानों का स्वामी है। वर्तमान में फर्नीचर से लेकर हर प्रकार की दुकानें यहां स्थापित हैं। यहां लगभग हर कार्यालय भी स्थापित है , जबकि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी इसी शहर से संबंधित रहे हैं। प्रदेश में अलग पहचान स्थापित करने वाले इस शहर की आज स्थिति पर गौर किया जाए, तो यहां दर्जनों मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पंचरुखी में  चित्रकार सोभा सिंह, आयरिश नाटककार नोरा रिचर्ड व शहीद कर्मचंद की कर्मस्थली से शहर विश्व मानचित्र पर अंकित है, लेकिन आज भी सुविधाएं जस की तस हैं। विडंबना यह है कि इस शहर में न बस स्टैंड और न ही टैक्सी स्टैंड उपयुक्त व्यवस्था है। स्वास्थ्य सुविधा का भी खास प्रावधान नहीं है और न ही कूड़ा कचरा फेंकने के लिए डंपिंग साइट का प्रावधान है। 1500 से 2000 की आबादी वाले इस शहर से रोजाना लगभग 100 से अधिक बसों सहित हजारों अन्य वाहनों का आवागमन होता है , लेकिन यहां बस स्टैंड, पार्किंग व्यवस्था न होने से बसें व अन्य वाहन सड़क के किनारे खड़े रहते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटना का अंदेशा लगा रहता है। कस्बे की सुरक्षा का जिम्मा संभालने के लिए एक चौकी है, जहां 10 से 15 कर्मचारी हैं और चौकी आसपास की 41 पंचायतें का जिम्मा संभाले हुए है, पर वाहन के नाम पर मात्र बाइक है। शहर में स्वास्थ्य केंद्र है,  जो कभी 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं देता था, पर उसका दर्जा  भी बढ़ने के बजाय घट गया। यहां ऐसा स्वास्थ्य केंद्र नहीं, जो रात को आपातकालीन सेवाएं मुहै करवा सके। अगर रात को किसी को स्वास्थ्य सुविधा की आवश्यकता पड़े तो उसे पालमपुर, टांडा या निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है। यही नहीं, पंचरुखी स्वास्थ्य केंद्र में भवन निर्माण के लिए लगभग दो वर्ष पूर्व शिलान्यास हुआ, पर आज तक एक पत्थर तक नहीं लगा है।

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