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हिमाचल सरकार तीन साल से कैशलैस

प्रदेश के विभिन्न महकमों में व्यवस्था ऑनलाइन, अब मंडल-उपमंडल स्तर पर लागू करने की तैयारी

newsशिमला – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद भले ही देश में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कैशलैस व्यवस्था को लेकर नित नए ऐलान हो रहे हों, मगर पहाड़ी राज्य ने इसकी शुरुआत वित्त वर्ष 2012-13 से ही कर दी थी। अब अंतिम चरण में मंडल व उपमंडल स्तर पर तैयारियां हो रही हैं। इसके तहत ड्राइविंग लाइसेंस, गन लाइसेंस व कुछ अन्य शुल्कों पर आधारित व्यवस्था को कैशलैस बनाने के लिए पॉस (प्वाइंट ऑफ सेल मशीन) मशीनें ली जा रही हैं। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 6000 स्वाइप मशीनों के लिए बातचीत चल रही है। वैसे प्रदेश सरकार को लगभग 10,000 स्वाइप मशीनों की जरूरत होगी। हिमाचल देश के उन गिनती के राज्यों में शुमार है, जहां यह व्यवस्था काफी पहले अपना ली गई थी। इसका मकसद सिस्टम में व्याप्त खामियों को दूर करना था। वहीं लीकेज को रोकना भी था। वर्ष 2012-13 में सबसे पहले ट्रेजरी द्वारा की जाने वाली सभी तरह की ट्रांजेक्शन्स को कैशलैस बनाया गया। इन्हें विभागीय स्तर पर ऑनलाइन किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में पौने तीन लाख कर्मचारियों की बड़ी फौज के वेतन-भत्तों को कैशलैस बनाते हुए ऑनलाइन किया गया। तीसरे चरण में दैनिक भोगी व अंशकालीन कर्मचारियों के वेतन भत्तों को भी ऑनलाइन किया गया। यानी ये भी कैशलैस हुई। लोक निर्माण विभाग, आईपीएच व अन्य बड़े महकमों में कांट्रेक्टर्स के भुगतान भी ऑनलाइन किए जा चुके हैं। आबकारी एवं कराधान विभाग के तहत जुटाई जाने वाली कर प्रणाली को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। अब मंडल व उपमंडल स्तर पर जितने भी शुल्क देय होते हैं, उन्हें भी पॉस मशीनों के जरिए ऑनलाइन करने की तैयारी है। हिमाचल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी के मुताबिक जुलाई महीने तक वित्त वर्ष 2017-18 में यह व्यवस्था भी लागू हो जाएगी। इसके लिए कुछ बड़े बैंकों से बातचीत की जा रही है। हिमाचल में पहले से ही बिजली-पानी के बिलों के भुगतान करने की व्यवस्था कैशलैस है। कालेजों में भी फीस जमा करने की ऑनलाइन व्यवस्था है। स्कूलों में इसे लागू करने की तैयारी परवान चढ़ रही है। परिवहन विभाग पहले ही इसे लागू कर चुका है, जबकि हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम द्वारा वोल्वो बसों में इसे लागू कर दिया गया है, जबकि सामान्य बसों में इसे लागू करने के लिए एचडीएफसी बैंक से करार चल रहा है। यानी हिमाचल पिछले तीन वर्षों से 90 फीसदी कैशलैस सिस्टम पर ही आगे बढ़ रहा है।

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