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71 लाख जरूरत, विभाग के पास मात्र 30 लाख लीटर पानी

नाहन —  जिला मुख्यालय नाहन के लिए दो पेयजल योजनाएं भले ही वर्षों पूर्व से चल रही हैं बावजूद इसके भी शहर प्यासा है। शहर के लिए प्रस्तावित तीसरी पेयजल योजना जो वर्ष 2011 में स्वीकृत हुई है का अभी तक श्रीगणेश ही नहीं हुआ है। आलम यह है कि करीब 70 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से प्रस्तावित इस पेयजल योजना का अभी तक कार्य ही आरंभ नहीं हुआ है। भले ही विभाग का तर्क है कि जलाल खड्ड से प्रस्तावित इस पेयजल योजना का प्रथम फेज का कार्य आरंभ हो चुका है।  हाल ही में विभाग को इस पेयजल योजना के लिए वन विभाग से फोरेस्ट क्लीयरेंस प्राप्त हुई है। मजेदार बात तो यह है कि जिला मुख्यालय नाहन में प्रतिदिन करीब 71 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन विभाग के पास केवल 30 लाख लीटर पानी ही उपलब्ध है। लोगों को कभी तीसरे दिन तो कभी चौथे दिन पानी की आपूर्ति हो रही है। गौर हो कि शहर के लिए पहली पेयजल योजना रियासतकाल में वर्ष 1911 में बनाई गई थी उस वक्त तत्त्कालीन सिरमौर के शासक ने नेहरस्वार से प्रवाह पेयजल योजना तैयार करवाई थी। वर्ष 2011 में केवल पांच हजार लोगों के लिए नेहरस्वार से यह प्रवाह पेयजल योजना बनाई गई थी। उसके उपरांत आजादी के बाद प्रदेश सरकार ने कालाअंब के खैरी से उठाऊ पेयजल योजना तैयार की। इन दोनों पेयजल योजनाओं से करीब 30 लाख लीटर पानी की आपूर्ति शहर के लिए की जा रही है। जब यह दोनों ही पेयजल योजनाएं बनाई गई थी तो पहली पेयजल योजना करीब पांच हजार लोगों के लिए जबकि दूसरी खैरी से उठाऊ पेयजल योजना करीब 25 हजार लोगों के लिए बनाई गई थी। अब शहर की जनसंख्या करीब 50 हजार पहुंच गई है लेकिन अभी भी शहर को केवल 30 हजार लीटर पानी की मुहैया हो रहा है।  विभाग का कहना है कि शहर के लिए जलाल खड्ड से तीसरी पेयजल योजना करीब 70 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है। आईपीएच के सहायक अभियंता ईं. नाजिर हुसैन ने बताया कि तीसरी उठाऊ पेयजल योजना के फर्स्ट फेज का कार्य शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शहर को करीब 71 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, मगर खैरी व नेहरस्वार पेयजल योजनाओं से प्रतिदिन करीब 30 लाख लीटर पानी ही मिल रहा है।

राजनीतिक रोटियां सेंक रहे नेता

जिला मुख्यालय नाहन की सबसे ज्वलंत पेयजल की समस्या को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं। भाजपा जहां कांग्रेस पर आरोप लगा रही है कि प्रदेश सरकार प्रस्तावित जलाल खड्ड पेयजल योजना पूरी नहीं कर रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि सरकार द्वारा बजट का प्रावधान कर दिया है। मजेदार बात तो यह है कि कोई भी राजनीतिक दल शहर के लोगों की प्यास बुझाने के लिए सजग नहीं है।

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