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एनजीटी ने रविशंकर को लगाई कड़ी फटकार

newsनई दिल्ली —  राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को यमुना के किनारे पिछले साल किए गए उनके विश्व सांस्कृतिक महोत्सव से पर्यावरण को हुए नुकसान पर दिए गए बयान को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। श्रीश्री का कहना है कि अगर पिछले साल यमुना नदी के तीरे आयोजित तीन दिन के सांस्कृतिक महोत्सव से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि सरकार और अदालत की है। इस कार्यक्रम की इजाजत वहीं मिली थी। प्राधिकरण ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए श्रीश्री रविशंकर को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि संस्था का रवैया बहुत गैर जिम्मेदाराना है और उसे इस बात की छूट नहीं है कि जो उसके मन आए, वह बोले। आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं है। इस मामले की अगली सुनवाई नौ मई को होगी। प्राधिकरण ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर ने प्राधिकरण की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर पूर्वाग्रह के जो आरोप लगाए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। श्रीश्री रविशंकर ने फेसबुक पर मंगलवार को लिखा था कि यदि विश्व सांस्कृतिक महोत्सव से पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा तो इसके लिए एनजीटी और सरकार को ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए। उन्होंने प्राधिकरण पर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है। एनजीटी ने याचिकाकर्ता से आध्यात्मिक गुरु के बयान का व्यापक ब्यौरा देने के लिए कहा है, जिससे  उसके बयान को रिकार्ड पर लिया जा सके। प्राधिकरण की विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कार्यक्रम से यमुना के इर्द-गिर्द हुए नुकसान की भरपाई पर 13.29 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 10 वर्ष का समय लगेगा। रिपोर्ट के मुताबिक नदी के दायीं तरफ करीब 120 हेक्टेयर और बायीं तरफ लगभग 50 हेक्टेयर जमीन को बहुत नुकसान हुआ है और कार्यक्रम के कारण जमीन की उपजाऊ क्षमता लगभग खत्म हो गई है। 47 पेज की रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि इस जमीन को उतना अधिक नुकसान हुआ है कि अब इसमें घास या पेड़ भी लगाना बहुत मुश्किल है, जबकि पहले यहां कई तरह के जानवर और छोटे जीव वास करते थे।

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