भारत ने लताड़ा चीन

कहा, नाम बदलने से ड्रैगन का नहीं हो जाएगा अरुणाचल

NEWSनई दिल्ली— अरुणाचल प्रदेश के छह जगहों के नाम चीन की ओर से बदले जाने पर भारत ने कहा है कि नाम बदलने से असलियत नहीं बदल जाती है, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने गुरुवार को बताया कि नाम के बारे में चीन की सरकार से अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है। जहां तक सीमा विवाद पर इसके असर का सवाल है तो सीमा विवाद के निपटारे के लिए दोनों देशों के बीच अलग व्यवस्था बनी हुई है, जिससे उम्मीद है कि दोनों देशों के लिए स्वीकार्य हल निकलेगा। गौरतलब है कि भारत द्वारा बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की इजाजत से भड़के चीन ने बुधवार को अपने नक्शे में अरुणाचल के छह जगहों के नाम बदल दिए हैं। चीन की ओर से प्रस्तावित महत्त्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट पर होने वाली मीटिंग के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि हमें मीटिंग के लिए निमंत्रण मिला है और हम इसे देख रहे हैं। गौरतलब है कि बैठक 14 मई को पेइचिंग में होने वाली है। वन बेल्ट वन रोड के एक हिस्से चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर को पाक अधिकृत कश्मीर से होकर ले जाने के प्रस्ताव के कारण भारत ने प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। चीन ने कहा है कि बैठक में भारत का प्रतिनिधि होगा। गौरतलब है कि भारत को उकसाने वाले इस कदम को चीन ने वैध ठहराया है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिणी तिब्बत’ बताता है। हालांकि भारत इसका विरोध करता रहा है।

दलाईलामा को लेकर कई बार चेताया

बता दें कि दलाईलामा की यात्रा को लेकर चीन ने पिछले एक महीने में भारत को कई बार चेतावनी दी थी। भारत ने पेइचिंग के बयान को दरकिनार करते हुए दलाईलामा की अरुणाचल यात्रा का प्रबंध किया था। नई दिल्ली ने इसे धार्मिक मामला बताते हुए कहा चीन से कहा था कि इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए। भारत और चीन की सीमा पर 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा विवाद का विषय है। चीन जहां अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत बताता है वहीं भारत का कहना है कि विवादित क्षेत्र अक्साई चिन इलाके तक है जिस पर 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने कब्जा कर लिया था। दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिये विशेष प्रतिनिधियों की 19 दौर की वार्ता हो चुकी है।

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