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कॉल डिटेल में बिटिया के कत्ल का राज!

एक बड़े पुलिस अफसर की दो वीवीपीआई के साथ क्या हुई लंबी बातचीत, जांच में जुटी सीबीआई

NEWSशिमला— कोटखाई गैंग रेप व मर्डर मिस्ट्री मामले में सीबीआई को छात्रा का डीएनए अभी तक भी आरोपियों से मैच न हो पाने के कारण अब टेलीकॉम तथ्यों का सहारा लेना पड़ रहा है।  इसी कड़ी में सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसी को कुछ ऐसे वीआईपीज नंबर भी हाथ लगे हैं, जिन्होंने घटना के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ लंबी बातचीत की है। इस अधिकारी द्वारा भी इन वीआईपीज से काफी देर तक बातचीत करने का दावा है।  बताया जाता है कि अब इस रिकार्ड को भी जांच में शामिल कर आगे बढ़ाया जा रहा है। ये दोनों वीआईपीज गैर राजनीतिक लोग ही बताए जा रहे हैं। इसी रिकार्ड में कई और लोगों से भी पुलिस कर्मियों व अधिकारियों की बातचीत की जांच हो रही है। उधर, मंगलवार को सीबीआई द्वारा 10 और संदेहास्पद लोगों के सैंपल लिए जाने की सूचना है। दरअसल, सीबीआई को जांच शुरू करती बार छात्रा के जो डीएनए सैंपल दिए गए हैं, उनसे आरोपियों के सैंपल मैच नहीं हो पा रहे।  इससे पहले लगभग 50 लोगों के सैंपल नेगेटिव आ चुके हैं। कई संदिग्ध लोगों को जांच एजेंसी ने निगरानी सूची में ही रखा है। सीबीआई को जांच सुपुर्द किए हुए 55 से भी ज्यादा दिन बीत चुके हैं, मगर अभी भी कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लग पाए हैं। यही वजह है कि टेलीकॉम रिकार्ड से जो अहम सुराग हाथ लगे हैं, उन्हीं के आधार पर अब आरोपियों की निशानदेही कर नई सैंपलिंग प्रक्रिया हो सकती है।  उधर परिजनों को इस बात की  पूरी उम्मीद है कि सीबीआई इस मामले की तह तक पहुंचेगी और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी।

आरोपी का डीएनए

छात्रा के शरीर पर गैंग रेप के दौरान काटे जाने के निशान मिले थे, जिनका डीएनए प्रिज़र्व किया गया था। इसी के सहारे आरोपी तक पहुंचने की जद्दोजहद है। दूसरा सैंपल स्वैब टेस्ट के जरिए हासिल किया गया था।

इसलिए पड़ी नार्को टेस्ट की जरूरत

जांच एजेंसी को डीएनए रिपोर्ट्स के साथ-साथ स्वैब टेस्ट रिपोर्ट्स के जरिए भी कोई महत्त्वपूर्ण सुराग नहीं मिल पा रहे हैं।  सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान पांचों गिरफ्तार आरोपियों ने विरोधाभासी बयान दिए। नतीजतन उनका नार्को टेस्ट करवाने की जरूरत पड़ी। दावा यह भी है कि हाई कोर्ट में अब सीबीआई फाइनल रिपोर्ट  पेश करेगी।

एक हजार दिन में हुई थी जांच

कांगड़ा में रेप मामले की जांच को एक हजार दिन का समय लगा था।  समारोह में नाबालिग के साथ बलात्कार हुआ था, मगर उसके सुराग नहीं मिल रहे थे। हालांकि बाद में पुलिस ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से इस मामले को सुलझाया था।

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