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नंदन नीलेकणि इन्फोसिस को देंगे नई एनर्जी

cereerनंदन नीलेकणि एक भारतीय उपक्रमी, नौकरशाह, नेता और प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक रहे हैं। इन्फोसिस में शानदार करियर के बाद नंदन ने भारत सरकार द्वारा गठित एक तकनीकी समिति की अध्यक्षता की। इसके बाद वह भारत सरकार द्वारा हर नागरिक को एक विशिष्ट पहचान संख्या या यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर प्रदान करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के अध्यक्ष बनाए गए।

प्रारंभिक जीवन

नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून, 1955 में कर्र्नाटक के बंगलूर में हुआ था। उनके पिता मोहन राव म्य्सोरे और मिनर्वा मिल्स में जनरल मैनेजर के पद पर कार्य करते थे और फैबियन साम्राज्यवाद में विश्वास रखते थे, जिसका प्रभाव बचपन में नंदन के ऊपर भी पड़ा। नंदन की पढ़ाई बंगलूर के बिशप कॉटन ब्वायज स्कूल और धारवाड़ के सेंट जोसेफ  हाई स्कूल और पीयू कालेज धारवाड़ में हुई। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बांबे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की। आईआईटी मुंबई की स्थापना सन् 1958 में हुई।

पांच साल तक रह चुके हैं कंपनी के सीईओ

नीलेकणि मार्च, 2002 से अप्रैल, 2007 तक कंपनी के सीईओ रहे थे। इसके बाद वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई)प्रमुख के पद पर रहे। नीलेकणि उन सात चर्चित संस्थापकों में से एक हैं, जिन्होंने 80 के शुरुआती दशक में आईटी कंपनी इन्फोसिस की स्थापना की थी। इन्फोसिस का सीईओ बनने से पहले नंदन ने कंपनी में विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिसमे शामिल हैं प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी। नंदन नीलेकणि की इन्फोसिस में वापसी हो गई है। इन्फोसिस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नंदन नीलेकणि को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। विशाल सिक्का के इन्फोसिस के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद कंपनी को स्थायित्व देने के लिए नीलेकणि को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। नंदन नीलेकणि को कई संस्थाओं द्वारा सम्मान व पुरस्कार भी मिले हैं।

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