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न औद्योगिक विकास हुआ, न युवाओं को रोजगार मिला

प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भाजपा व कांग्रेस लगातार दावे करती रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ भिन्न ही है। औद्योगिक विकास को लेकर सरकारों की स्थिति आगे दौड़-पीछे चौड़ की ही अधिक रही है। घर-द्वार पर युवाओं को रोजगार के अवसर जुटाने के लिए प्रदेश के भीतरी क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना, आधारभूत ढांचा विकसित करने, उद्योग मित्र वातावरण निर्माण तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कारगर कदम उठाए जाने की आवाज हर क्षेत्र से उठती रही है। जिला ऊना में सबसे पहले 1974 में मैहतपुर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया तथा 155 प्लाट व 26 शैड बनाकर तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से औद्योगिक इकाइयों को विशेष सुविधाएं देकर आबंटित किया, लेकिन सुविधाओं व अनुदान की समाप्ति पर इन इकाइयों ने यहां से पलायन कर लिया। मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र की मौजूदा स्थिति भी सुखद नहीं है। यहां पर अधिकांश औद्योगिक इकाइयां रुगनावस्था में है तथा उनके पुनःउत्थान के लिए सरकार कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठा पाई है। मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए भी सरकार गंभीर नहीं है। औद्योगिक विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार मिलने की आशा फलीभूत नहीं हो पा रही है। ‘दिव्य हिमाचल’ ने इस संदर्भ में ऊना विस क्षेत्र के लोगों से राय जानी तो उन्होने कुछ यूं अपने विचार व्यक्त किए।

मैहतपुर में अधिकतर उद्योग ठप

युवा कारोबारी व ऊना के वार्ड चार के निवासी निशांत चौधरी ने कहा कि युवा वर्ग के लिए सबसे बड़ी चिंता रोजगार की है। उद्योगों में युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए सरकारों को प्रयास करने चाहिए। मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर उद्योग ठप पड़े है। इसके जीर्णोद्वार के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए।

औद्योगिक क्षेत्र का नहीं हुआ विस्तार

ऊना के वार्ड सात के निवासी रजनीश लूंबा ने कहा कि पिछले 12 सालों से मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर चर्चाएं सुनने को मिल रही है, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र में कोई नया बड़ा उद्योग नहीं आ पाया है। इसमें युवाओं को रोजगार मिल पाए। इस दिशा में प्रयास होना चाहिए।

पैकेज एन्ज्वॉय कर निकल रहे उद्योग

मुख्य बाजार ऊना में व्यवसायी पंकज कालिया ने कहा कि प्रदेश को जब-जब औद्योगिक पैकेज मिला, उसी दौरान प्रदेश में उद्योग आए तथा पैकेज को एन्ज्वॉय करने के बाद पलायन कर गए। उद्योगों को स्थायी रूप से प्रदेश में कार्य करने के लिए प्रभावी नीति बननी चाहिए। मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र को रूगनावस्था से निकालने के लिए कारगर कदम उठाए जाएं।

रोजगार को बाहर जा रहे युवा

युवा रोहित ने कहा कि सरकार घर-द्वार पर रोजगार के दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। मैहतपुर में चंद उद्योगों को छोड़ दें तो अधिकतर उद्योगों की हालत ठीक नहीं है। इसके चलते युवाओं को घर से दूर बद्दी, परवाणू व लुधियाना इत्यादि स्थानों पर रोजगार की तलाश में जाना पड़ रहा है।

सुविधाओं की कमी से बंद रहे उद्योग

मैहतपुर-बसदेहड़ा से संजय जोशी ने कहा कि मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुए चार दशक से अधिक समय बीत चुका है। दो-चार उद्योगों को छोड़ दे तो अधिकतर उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। सुविधाओं के अभाव में यह क्षेत्र दम तोड़ रहा है। यदि यहां पर सुविधाओं को बढ़ाया जाए तथा नए उद्योगों को स्थापित किया जाए तो क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल पाएगा।

औद्योगिक क्षेत्र में नहीं हुआ कोई सुधार

मैहतपुर-बसदेहड़ा से राजेश राणा ने कहा कि वनगढ़ में मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र के दूसरे चरण की स्थापना के लिए चर्चाएं रही, लेकिन न तो दूसरे चरण पर काम हुआ, न ही पहले से स्थापित औद्योगिक क्षेत्र में कोई सुधार हो पाया। नतीजन यहां से अधिकांश उद्योग पलायन कर चुके हैं। युवाओं को रोजगार के लिए बाहरी क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है।

पलायन से क्षेत्र को हो रहा आर्थिक नुकसान

मैहतपुर-बसदेहड़ा से महेश जोशी ने कहा कि मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना का सबसे अधिक लाभ स्थानीय युवाओं को ही मिलना था, लेकिन उद्योगों के पलायन से युवाओं को तो रोजगार से हाथ धोना ही पड़ा है। इससे उन्हें घर का खर्चा चलना मुश्किल हो रहा है, वहीं इससे क्षेत्र की आर्थिकी को भी नुकसान उठाना पड़ा है।

विस्तार-विकास को कदम उठाए सरकार

मैहतपुर-बसदेहड़ा से विशाल कुमार ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र मैहतपुर के विस्तार व विकास के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। इससे युवाओं को घर के नजदीक ही रोजगार मिलेगा, वहीं प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष ढंग से क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल पाएगा और क्षेत्र के विकास में भी तेजी आएगी।

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