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मोदी-आबे की बुलेट दोस्ती

भारत दौरे पर जापान के पीएम, चर्चा में पांच मुद्दे होंगे सबसे ज्यादा अहम

NEWSअहमदाबाद— भारत और जापान के संबंधों में बुलेट ट्रेन जैसी तेजी की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और पीएम नरेंद्र मोदी गुरुवार को ऐसे कई मुद्दों पर ठोस बात करेंगे, जिनसे दोनों देशों की दोस्ती बढ़ेगी। आबे बुधवार को भारत की यात्रा पर सीधे गुजरात आए। किसी विदेशी राष्ट्र प्रमुख का दिल्ली छोड़ सिर्फ गुजरात आना विशेष बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव हो सकते  हैं, ऐसे में यह यात्रा राजनीतिक तौर पर भी अहम है। दोनों नेता गुजरात के गांधीनगर में सालाना शिखर बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह ऐसी चौथी शिखर बैठक है। इस दौरान दोनों देश अपनी स्पेशल स्ट्रैटिजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप का विस्तार करने पर बातचीत करेंगे।

1. उत्तर कोरिया : भारत और जापान की सालाना बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का मुद्दा गरम है। अमरीका, जापान और दक्षिण कोरिया उसके खिलाफ हैं और भारत ने भी उत्तर कोरिया के रुख की आलोचना की है। बता दें कि डोकलाम में जब भारत और चीन के बीच टकराव चला था तो जापान ने खुलकर भारत का समर्थन किया था। शिखर बैठक में क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर बात होगी।

2. एटमी करार : दोनों देशों के बीच सिविल एटमी डील का करार लागू हो चुका है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि इस करार को कैसे आगे ले जाया जाए, इस पर बात हो सकती है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर साइन नहीं किए हैं, फिर भी जापान परमाणु बिजली बनाने की तकनीक देगा। मुमकिन है कि पावर प्लांट के उपकरण मेक इन इंडिया के तहत बनाने पर भी बात हो।

3. एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर : दोनों देशों की सालाना बैठक में एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर का मुद्दा अहम होगा, जो चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट का जवाब माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया है कि इसके लिए कवायद जारी है। हम इस पर जापान और तीसरे देशों से गठजोड़ की उम्मीद रखते हैं और इसमें मैच्योरिटी आ रही है।

4. रक्षा सहयोग : भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग प्राथमिकता का क्षेत्र बताया गया है। इसी महीने पूर्व रक्षा मंत्री अरुण जेटली जापान गए थे और उनकी वहां के रक्षा मंत्री से बातचीत हुई थी, जिसमें रक्षा सहयोग बढ़ने के संकेत मिले थे। भारत नेवी के लिए 12 समुद्री सर्विलांस विमान यूएस टू आई की डील फाइनल कर सकता है। ऊंची कीमत के कारण इस डील के पूरा होने का सात साल से इंतजार है।

5. समुद्री सहयोग : दोनों देशों में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी बातचीत होने की उम्मीद है, क्योंकि इस मसले पर दोनों के हित जुड़े हुए हैं। हिंद महासागर और साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच दोनों देशों में सहयोग जरूरी माना जा रहा है।

चीन ने फिर दिखाई हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट्स में रुचि

पेइचिंग — चीन ने भारत में हाई स्पीड रेल परियोजनाएं स्थापित करने के अपने प्रस्ताव को नए सिरे से पेश करने में रुचि दिखाई है। भारत ने इस तरह की पहली परियोजना के लिए जापान को अपना भागीदार चुना है। चीन के विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता गेंग शुआंग से जब मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापानी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चीन को क्षेत्र के देशों में हाई स्पीड रेल सहित अन्य बुनियादी ढांचे को देखने में खुशी है। उन्होंने एक तरह से परियोजना की बहाली में रुचि दिखाते हुए कहा कि हम क्षेत्रीय सहयोग के लिए भारत और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने को तैयार हैं। जहां तक रेलवे सहयोग का सवाल है तो यह भारत और चीन के बीच व्यावहारिक सहयोग का हिस्सा है।

September 14th, 2017

 
 

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