सीएम को याद है 2007 का विदेश दौरा

अचानक लग गई चुनाव आचार संहिता, नहीं मिला था घोषणाओं का मौका

newsशिमला— मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वह समय कभी भुला नहीं पाए होंगे, जब वह विदेश में थे और यहां चुनाव आचार संहिता लग गई थी। सीएम को तब कोई मौका ही नहीं मिल पाया था। शायद उसी से सबक लेकर इस दफा सीएम ने वे सभी घोषणाएं कर दीं, जिनका प्रभाव चुनाव में दिख सकता है। वर्ष 2007 में अक्तूबर का वह महीना जब सीएम वर्ल्ड बैंक के दौरे के दौरान विदेश में थे। यहां केंद्रीय चुनाव आयोेग ने आचार संहिता लगा दी। कारण था कि कबायली क्षेत्रों के चुनाव भी एक साथ करवाने हैं, इसलिए ऐसा समय चाहिए था, जब वहां के रास्ते भी खुले रहते हैं।  इसके बाद बर्फबारी हो जाती है और वहां एक साथ चुनाव नहीं हो पाते। हालांकि इसका कांग्रेस ने कड़ा विरोध भी किया और राष्ट्रपति तक को ज्ञापन भेजे, परंतु चुनाव आयोग ने जो तर्क दिए उनके बाद सभी नतमस्तक थे। ऐसे में यहां वीरभद्र सिंह वह कुछ नहीं कर पाए, जिससे मतदाताओं को लुभाया जा सकता और तब कांग्रेस की सरकार को हटना पड़ा। अपने उस कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए इस दफा मुख्यमंत्री ने ऐसी कोई गल्तियां नहीं कीं। चरणबद्ध ढंग से यहां पर घोषणाएं की गईं और कैबिनेट में फैसले लेकर अधिकांश वर्गों को राहत देने का प्रयास किया गया है। ये प्रयास क्या रंग दिखाएंगे, ये तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे, लेकिन सीएम को इस बात का मलाल नहीं रहेगा कि वह कोई लुभावनी घोषणाएं नहीं कर पाए। इस दफा सत्तापक्ष को ज्ञात है कि अब कभी भी चुनाव आचार संहिता लग सकती है। लिहाजा जितनी बड़ी घोषणाएं खासकर कर्मचारी वर्ग के की जा सकती थीं, वे कर दी गई हैं। केवल पेंशनर वर्ग रह गया है, जिनको आश्वासनों के बावजूद भी कुछ हासिल नहीं हो सका है। भी सरकार की एक और कैबिनेट बैठक जल्द हो सकती है, जिसमें उन सभी छूटी हुई घोषणाओं को अमल के लिए लाया जाएगा, जिनसे चुनाव में कांग्रेस को लाभ मिल सके।

हर वर्ग के लिए कर चुके हैं ऐलान

युवाओं को बेरोजगारी भत्ते जैसा मामला पहले ही सुलझाया जा चुका है, वहीं कौशल विकास भत्ते का लाभ भी दिया जा रहा है। अब ये मुद्दे गौण हो गए हैं, जिसे सत्तापक्ष इस चुनाव में भुनाएगा। ऐसी कई तरह की घोषणाएं आचार संहिता लागू होने से पहले की जा चुकी हैं। लिहाजा इस दफा मुख्यमंत्री ने इस मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी। न तो समय का इंतजार किया और न ही मौके का। सबक लेकर सरकार ने जो मौका नहीं गंवाया इसका कितना फायदा चुनाव में मिलेगा ये जल्दी साफ हो जाएगा।

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