सैहब सोसायटी की हड़ताल, शिमला में बिगड़ी कूड़ा उठाने की चाल

NEWS शिमला- पहाड़ों की रानी का शृंगार आजकल कूड़ा और गंदगी कर रही है। दुनिया के बेहतरीन चुनिंदा पर्यटक स्थलों में शुमार शिमला आज कूड़ादान बनकर रह गया है। सात साल पहले जब शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सैहब सोसायटी बनाई गई तो ठेके की व्यवस्था से तंग नगर निगम और शहर के लोगों ने राहत की सांस ली। काफी समय तक काम सही से पटरी पर चलता रहा। कर्मचारियों को भी तय समय में वेतन मिलता रहा। डोर-टू-डोर गारबेज योजना इतनी सफल रही कि दूसरे निकायों ही नहीं अन्य राज्यों में भी इस योजना को अपनाने की बात हुई, लेकिन आज यही सोसायटी नगर निगम शिमला व शहर की जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। अब जब नगर निगम के पास सैहब का कोई अन्य विकल्प नहीं है तो सैहब सोसायटी न केवल निगम के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही है, बल्कि चौथी बार हड़ताल पर चले गए हैं। नगर निगम के बीते कार्यकाल में भी कर्मचारियों ने लंबे समय तक हड़ताल की। उस समय कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग पर अड़े थे। उस वेतन में वृद्धि की गई। जब कर्मचारियों को सोसायटी के तहत लाया गया तो 3300 रुपए वेतन दिया गया, उसके बाद कई बार वेतन बढ़ा और वर्तमान में 6700 रुपए ग्रॉस वेतन कर्मचारियों को दिया जाता है, जबकि 5832 कैश इन हैंड मिलता है, लेकिन अब कर्मचारी सीधे 30 फीसदी वृद्धि की मांग कर रहे हैं, जो नगर निगम के लिए चुनौती से कम नहीं।

सैहब सोसायटी की मांगें

* कर्मचारियों को नगर निगम में मर्ज किया जाए

* मर्ज नहीं तो न्यूनतम वेतन 10500 किया जाए

* कर्मचारियों के काम के घंटे निश्चित हों

* एनुअल जनरल वार्डों की बैठक जल्द हो

34 वार्डों में अव्यवस्था

जब भी सैहब कर्मचारियों की हड़ताल होती है तो निगम कलेक्शन सेंटर से कूड़ा उठाने का प्रबंध करता है, लेकिन कलेक्शन सेंटर तक उन्हीं घरों से कूड़ा आता है, जो सड़क के नजदीक हैं। बाकी घरों में कूड़ा कई दिनों तक पड़ा रहता है, वहीं डस्टबिन भी समय पर खाली नहीं हो पाते। अब हड़ताल से 34 वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है।

शहर को कूड़े से यह परेशानी

यहां-वहां फैले कूड़े के ढेर बंदरों और आवारा कुत्तों को खुला निमंत्रण देते हैं। इसके चलते राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। आईजीएमसी एमएस डाक्टर रमेश के अनुसार कूड़े से कीटाणुओं का जन्म होता है, जो वातावरण से सांस द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। इसके अलावा मक्खी और मच्छर फैलते हैं, जो हमारे भोजन को दूषित करते हैं।

ऐसा है गारबेज कलेक्शन

नगर निगम में गारबेज कलेक्शन के लिए डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन की व्यवस्था है। घरों से कूड़ा उठाने के लिए वार्डवाइज सैहब कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। घरों से कूड़ा उठाकर यही कर्मचारी निगम की गाडि़यों में कूड़ा लोड करते हैं। ये गाडि़यां भरयाल स्थित कूड़ा संयंत्र तक कूड़ा पहुंचाती है, जहां पर कूड़े से बिजली बनाने का काम हाल ही में शुरू हुआ है।

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