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हमें डराने के लिए किया गया है मानहानि का मुकदमा

अमित शाह के बेटे जय के खिलाफ सनसनीखेज खुलासा करने वाले संपादक सिद्धार्थ वरदराजन बोले

newsनई दिल्ली —  न्यूज वेबसाइट ‘दि वायर’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि बीजेपी प्रमुख अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी के कारोबार में एक साल के भीतर 16 हजार गुना बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ा तो जय शाह ने रिपोर्टर और दि वायर के संपादक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया। न्यूज वेबसाइट दि वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि वह सरकार की मानहानि का सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें स्टोरी छापने के जोखिम का अंदाजा था। उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रमुख अमित शाह के बेटे जय शाह के वकील ने पहले ही मुकदमे की धमकी दी थी। सारे मसले पर दि वायर के संपादक ने कुछ इस तरह अपना पक्ष रखा है…

जय से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक होना जरूरी था : सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि ऐसी तमाम तरह की बेबुनियाद चीजें हैं और वे अपने बचाव में कुछ भी कह सकते हैं। हकीकत तो यह है कि एक बहुत ही सीधी और सरल सी स्टोरी है, जिसमें आधिकारिक रूप से जो डाटा दिए गए हैं उनका अध्ययन कर पब्लिक के सामने रखा गया। इसमें न तो कोई सियासत है और न ही कोई इल्जाम है, जिसकी प्रतिक्रिया में आप मानहानि की बात कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट को मानहानि से डराना प्रेस की आजादी पर हमला है। एक सीधी सरल रिपोर्ट पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की मंशा और क्या हो सकती है। इन्होंने सिविल के साथ क्रिमिनल मानहानि का भी मुक़दमा किया है। केस में कुछ ऐसे लोगों के भी नाम जोड़ दिए गए हैं जिनका पूरे वाकये से कोई ताल्लुक ही नहीं है। ये पूरी तरह से मीडिया को डराने और धमकाने की कोशिश की जा रही है। यह हमला न केवल हम पर है, बल्कि पूरे भारतीय मीडिया पर है। परेशान करना चाहती है सरकार : सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि हमारे पास मानहानि के कोई औपचारिक नोटिस या कागज नहीं आए हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए हमने देखा है। सरकार के रुख से साफ है कि वह ‘द वायर’ को परेशान करना चाहती है। यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। हम सरकार के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ेंगे। जय शाह के खिलाफ स्टोरी छपने के जोखिम को लेकर हमारी आंखें खुली हुई थीं। उनके वकील को मैंने कई सवाल भेजे थे, जिनका उन्होंने जवाब भी दिया थाद्ध उनके वकील ने हमें पहले ही कह दिया था कि आप इन जवाबों के बावजूद जय शाह के खिलाफ स्टोरी छापेंगे तो आपके खिलाफ मुकदमा किया जाएगा। ये न सिर्फ खतरा था, बल्कि हमें धमकी दी गई थी। धमकी को अच्छी तरह समझते हुए हमने जनहित में इसे छापा। हमे लगा कि आधिकारिक रूप से जो डाटा हमने निकाला है, उसे लोगों के बीच जाना चाहिए। बचाव में क्यों उतरी सरकार : सिद्धार्थ ने सवाल उठाया कि शाह के वकील ने कहा कि उनका क्लाइंट एक व्यक्ति है न कि सरकार से कोई संबंध है। ऐसे में पीयूष गोयल एक निजी आदमी को बचाने के लिए क्यों उतरे? पीयूष गोयल तो एक मंत्री हैं और सरकार के आदमी हैं। भारत सरकार का एक मंत्री ने प्रेस कान्फ्रेंस की और जय शाह का बचाव किया, इससे क्या साबित होता है। एक मंत्री ने सामने आकर मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की घोषणा की। अब तो यह आम बात हो गई है कि कोई सवाल उठाए तो मानहानि का मुकदमा लगा दो। हमने तो रिपोर्ट में ऐसे कोई इल्जाम लगाए ही नहीं हैं, जिसके आधार पर पीयूष गोयल साहब कहें कि यह बदनाम करने की कोशिश की गई है। यह कहने का कोई मतलब नहीं हैं कि हम शाह साहब को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें यह भी समझना चाहिए कि जिस रिपोर्टर ने यह स्टोरी की, उसी ने 2011 में इकॉनोमिक टाइम्स में रॉबर्ट वढेरा कांड को उजागर किया था। अगर अमित शाह और बीजेपी के खिलाफ एजेंडा है, तो वह स्टोरी कैसे छपी थी?

 

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