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पढ़ाने का तरीका मंडी के शिक्षकों से सीखें

खास शिक्षा कार्यक्रम के तहत छोटी काशी पहले, सोलन दूसरे स्थान पर

 सुंदरनगर — क्षा विभाग के खास शिक्षा कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर में इस बार भी मंडी जिला का दबदबा रहा है, जबकि सोलन जिला दूसरे नंबर पर रहा है। मंडी में भी सबसे ज्यादा पुरस्कार प्राप्त करने का श्रेय सुंदरनगर शिक्षा खंड के नाम रहा है। जहां पिछले दो साल में इस क्षेत्र में छह पुरस्कार प्राप्त किए गए हैं। इस बात की पुष्टि बीआरसी सुंदरनगर शशि शर्मा ने की। सहजता से पहली से लेकर आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने की प्रक्रिया में सुंदरनगर के शिक्षक प्रदेश में आगे रहे हैं। शिक्षकों द्वारा बच्चों को प्रायोगिक विधि और शिक्षा अधिगम सामग्री (टीएमएल) के माध्यम से स्कूलों में अध्ययन करवाने समेत अन्य सिस्टम अपने स्तर पर अपनाने में शिक्षक अग्रणी भूमिका में है। इस बार राजकीय उच्च स्कूल बाड़ी के मेडिकल शिक्षिका दिव्य नेगी बच्चों को प्रायोगिक विधि से पढ़ाने में बेहतर आंकी गई है और बीआरसी सुंदरनगर द्वारा समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करने के दौरान इस स्कूल की शिक्षिका का अध्यापन का सिस्टम बेहतर आंका गया है, जिसके चलते ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर की मूल्यांकन कमेटी के लिए दिव्य नेगी शिक्षिका का नामांकन इस कार्यक्रम के तहत किया गया। जहां राज्य स्तरीय कमेटी ने शिक्षिका के प्रयासों की सराहना करते हुए खास शिक्षा कार्यक्रम के तहत पुरस्कार के लिए चयनित किया है। शिक्षा विभाग की ओर से इस स्कूल के एक अन्य ड्राइंग टीचर तिलक का भी नाम चयनित किया गया है। तिलक द्वारा बच्चों को चित्रकला की क्रियाएं शिक्षा अधिगम सामग्री के आधार पर बताने में अग्रणी प्रयास किए गए हैं, जो कि नियमित तौर पर इस तरह की पद्धति के तहत बच्चों को स्कूलों में अध्ययन करवा रहे हैं और सरकारी स्कूलों में दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरे हैं। मंडी जिला के ही शिक्षा खंड एक सिराज में राजकीय प्राथमिक स्कूल बरयोगी के शिक्षक दलीप सिंह व जीपीएस रेशान महेंद्र कुमार के प्रयासों से स्कूल में बच्चों की संख्या 26 से 43 हुई है और बच्चों को टीएलएम के तहत पढ़ाया जा रहा है। स्कूल में पुस्तकालय को भी खूब सुसज्जित किया गया है।

महादेव स्कूल पहले भी छाया

मंडी जिला के बाद दूसरे नंबर पर जिला सोलन रहा है। कंडाघाट शिक्षा खंड के जीपीएस स्कूल धारजा की शिक्षक ममता शर्मा के भी बच्चों को प्रायोगिक विधि से पढ़ाने की तकनीक के साकारात्मक परिणाम स्कूल में सामने आए हैं। इससे पूर्व पिछले साल भी भौण स्कूल की शिक्षिका उर्मिला शर्मा व फागला स्कूल के शिक्षक राकेश शर्मा और मल्होत्रा का नाम यह सम्मान रहा है। महादेव स्कूल से भी अर्पणा शिक्षिका का चयन होने पर सम्मानित किया जा चुका है।

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