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बाबा बजरोट मंदिर

धार्मिक आस्था एवं विश्वास के रूप में 64 योगिनियों तथा 84 सिद्धों की पूजा विशेष रूप में की जाती है। अपने तपोबल के कारण यह सिद्धगण हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा लोग इन सिद्धगणों को हजारों वर्षों से पूजते आ रहे हैं। बाबा बजरोट का मंदिर मंडी नगर से 26 किमी. दूर पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि बाबा बजरोट ने इस स्थान पर तपस्या की थी। पिंडी के रूप में स्थापित बाबा बजरोट का दर्शन करने हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। बाबा बजरोट अन्न-धन, दूध तथा पुत्र प्राप्ति का वरदान देकर श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी करते हैं। बहुत वर्ष पहले बाबा बजरोट की पूजा-पाठ करने को लेकर ब्राह्मणों तथा राजपूतों के बीच आपसी टकराव हो गया था। दोनों पक्ष किसी भी तरीके से शांत होने को नहीं मान रहे थे। दोनों पक्षों को बाबा बजरोट के प्रांगण में बैठाया गया तथा पुजारी के माध्यम से बाबा ने शर्त रखी कि जो भक्त लकड़ी की तलवार से बकरे को काटेगा, वहीं पक्ष मेरी पूजा करने का अधिकारी होगा। ब्राह्मणों को डर हो गया कि अगर लकड़ी की तलवार से बकरे का सिर नहीं कटा तो अपमान होगा। उन्होंने पहला मौका राजपूतों को दिया, फिर क्या था। भीड़ में राजपूतों के नौजवानों ने तलवार उठाई और पहले ही बार में बकरे का सिर काट दिया। बाबा जी की जय-जयकार होने लगी तथा मंदिर की पूरी व्यवस्था वही राजपूत वंशज करते आ रहे हैं। अब तो बलि प्रथा पर प्रतिबंध है तथा बकरों को पानी डालकर ही छोड़ दिया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मंदिर तक सड़क का निर्माण कर दिया गया है। इस मंदिर पर ज्यादा ध्यान इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वन भूमि होने के कारण ज्यादा गतिविधियां न हो सकी। सरकार  तथा प्रशासन अगर इस स्थान को धार्मिक पर्यटन स्थल बनाने की ओर थोड़ा ध्यान दें, तो यह स्थान समृद्ध हिमाचल की विकास गाथा का आदर्श टूरिस्ट सर्किट बन सकता है।

– श्री ठाकुर दास , मंडी

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