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मंदिरों से दूर हों दारू-मांस की दुकानें

कांगड़ा में बोले जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अचुत्यानंद 

कांगड़ा —  कांगड़ा, ज्वालाजी, नयनादेवी चिंतपूर्णी व चामुंडा आदि  शक्तिपीठों से शराब व मांस की दुकानें 25 किलोमीटर दूर रखी जाएं। यह बात शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अचुत्यानंद तीर्थ  ने मंगलवार को  गीता भवन  में एक पत्रकार सम्मेलन  में कही।  उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने  बद्रीनाथ, केदारनाथ, हरिद्वार तीर्थ स्थलों पर मांस-मदिरा पर रोक लगई है और प्रदेश सरकार ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वृंदावन, बरसाना, नंदगाह आदि पर मांस मदिरा पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि आवश्यक है कि हिमाचल जो कि देवभूमि है, में मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि अभी तक देवभूमि के प्रमाण नहीं मिलते, क्योंकि देखने में आया है कि 13 साल से ऊपर के बच्चे नशे में संलिप्त है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठों के 25 किलोमीटर के दायरे में अगर नई सरकार ने प्रतिबंध नहीं लगाया तो वह हिमाचल हाई कोर्ट में फरवरी मार्च में जनहित याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाने पर में पूछना चाहता हूं कि वहां पर पर्यावरण के लिए क्या मापदंड अपनाने  जा रहे हैं। अंधाधुंध पेड़ों के काटने से  प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।  उन्होंने कहा कि वैसे भी धर्मशाला में प्रवासियों का बोलबाला है, जिनकी संस्कृति व खान-पान हमारे साथ नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि आज तक केवल हिंदुओं के मंदिरों का अतिक्रमण सरकारों द्वारा किया गया है क्या कभी किसी मस्जिद व गिरिजाघर का भी अतिक्रमण किसी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में हम एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डालने जा रहे हैं।

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