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लारजी में घटा बिजली उत्पादन

पानी की कमी से हालात खराब, प्रदेश के राजस्व को नुकसान

कुल्लू— प्रदेश में ठंड बढ़ते ही जल विद्युत परियोजना में उत्पादन घटने लगा है। नदियों का पानी बहुत कम हो गया है, जिससे उत्पादन घट रहा है। जिला कुल्लू की जल विद्युत परियोजनाओं में भी ठंड बढ़ते ही बिजली उत्पादन घटने लगा है। जिला में स्थापित 126 मेगावाट लारजी प्रोजेक्ट में कुल क्षमता से भी कम बिजली प्रतिदिन तैयार हो रही है। 126 मेगवाट से इन दिनों पानी की कमी से उत्पादन 40 मेगवाट पहुंचा है। लिहाजा, एक उत्पादन एक-तिहाई ही रह गया है। प्रोजेक्ट्स पर ठंड की मार से प्रदेश सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। कड़ाके की ठंड से नदियों तथा खड्डों का जलस्तर काफी कम हो गया है। ब्यास नदी पर स्थापित 126 मेगावाट की लारजी परियोजना में इन दिनों 40 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है। ब्यास नदी का जलस्तर 76 क्यूसिक तक रह गया है। दो माह पहले ब्यास नदी में पानी का बहाव 185 क्यूसिक रिकार्ड किया गया था। इससे परियोजना में 90 मेगावाट बिजली तैयार हो रही थी। यह घटकर 40 मेगावाट तक पहुंच गई है। जानकारी के अनुसार गर्मी के दिनों में लारजी जल विद्युत परियोजनाओं में पानी ज्यादा होने से 3000 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होता है और इस बार भी गर्मी के दिनों में जल स्तर अधिक होने से इतना यूनिट बिजली उत्पादन हुआ है। एक महीने से ठंड शुरू होते ही ब्यास-पार्वती सहित अन्य सहायक नदी-नालों का पानी कम होता गया और मौजूदा समय में उत्पादन 1000 मिलियन यूनिट पहुंच गया है। अभी तो जिला कुल्लू में बर्फबारी नहीं हुई है। कड़ाके की ठंड से नाले बर्फबारी से पहले ही जाम होने लगे हैं।

ग्रामीणों को परेशानी

बिजली का उत्पादन कम होने के कारण विद्युत प्रमंडल चास में बिजली कटौती बढ़ गई है। डीवीसी की इकाई-एक में होने वाले आधुनिकीकरण के कारण बिजली कटौती बढ़ी है। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों को हो रही है। ग्रामीण इलाकों में बिजली कम वोल्टेज में पहुंच रही है।

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