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सियासत ने प्यासा ही रखा सोलन

सोलन — मैं गिरि पेयजल योजना हूं। मेरा शिलान्यास वर्ष 2003 में किया गया। मैं अभी पूर्ण रूप से तैयार भी नहीं थी कि 14 अप्रैल, 2008 को मेरा शुभारंभ कर दिया गया। आठ वर्ष से भी अधिक का समय बीत चुका है, पर मैं अभी भी अधूरी ही हूं। बहुत दुख होता है, जब सोलन शहर व आसपास के एक लाख लोगों को मेरी वजह से प्यासा रहना पड़ता है। नेताओं ने मेरे नाम पर कई बार वोट तो लिए, लेकिन किसी ने मेरे अधूरेपन को पूरा करने का प्रयास नहीं किया।  मैंने गिरि गंगा को सोलन पहुंचाया। मेरा निर्माण दो स्टेज में होना था। पहली स्टेज धारों की धार में पूरी होनी थी, जबकि दूसरी स्टेज धारों की धार से सोलन तक है। पहली स्टेज में मेरे लिए दस लाख गैलन का वाटर स्टारेज टैंक तो बनाया, लेकिन आज तक इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। इस टैंक में पानी की लीकेज इतनी अधिक है कि लाखों गैलन व्यर्थ ही बह जाता था। इसके बाद सरकार और आईपीएच विभाग ने कभी इस टैंक की रिपेयर करने के बारे में सोचा तक नहीं। गिरि गंगा का पानी मेरे माध्यम से सीधे सोलन और परवाणू तक पहुंचाया जा रहा है। अचानक से बिजली कट लगता है तो पूरा पानी प्रेशर के साथ वापस गिरी नदी की तरफ खिंचा चला जाता है, जिसकी वजह से मेरी पाइप टूट जाती है। कई दिनों तक मैं सोलन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी नहीं पीला पाती हूं। आज जनता भले ही मुझे कोसती है, लेकिन आज तक मेरी हकीकत जानने का प्रयास किसी ने नहीं किया। जी हां! गिरि पेयजल योजना की यही सच्चाई है। प्रत्येक विधानसभा चुनावों पेयजन योजना के नाम पर नेता वोट मांगते है और श्रेय लेने का प्रयास करते हैं, लेकिन योजना की हालत देख लगता नहीं कि वे इसके हकदार हैं। योजना पर 70 करोड़ रुपए खर्च किए गए फिर भी लोग प्यासे हैं। यदि धारा की धार स्थित टैंक को ठीक कर दिया जाए तो न केवल सोलन शहर, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्रों के  गले तर हो जाएंगे। हालांकि नेता जांच की बात तो करते हैं, पर होता कुछ नहीं। पेयजल योजना के लिए ट्रांसफार्मर लगाए जाने की कहानी भी बड़ी अजीब है।

जल चुकी हैं मोटरें

वर्ष 2005 में सरकार ने 18 करोड़ रुपए का बजट दिया। सात वर्ष तक ट्रांसफार्मर का काम पूरा ही नहीं हो पाया। इस दौरान कई बार मोटरें वोल्टेज कम होने की वजह से जल चुकी हैं। जब लाखों रुपए का नुकसान हो चुका था तो  वर्ष 2014 में सब-स्टेशन की सुविधा दी गई।

* गिरि पेयजल योजना को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। यह योजना नियमित रूप से नहीं चल पाती है। योजना में अभी भी कुछ  कमियां हैं, जिन्हें जल्द पूरा किया जाना चाहिए

पवन गुप्ता, पूर्व अधक्ष, नप

* ग्रामीण क्षेत्रों को भी गिरि का पानी दिया जाता है। कई बार सप्ताह में एक दिन पानी की सप्लाई मिलती है। यदि पेयजल योजना सुचारू रूप से चले तो प्रतिदिन पानी की सप्लाई मिल सकती है

भूपेंद्र ठाकुर, पूर्व प्रधान, आंजी

* गिरि पेयजल योजना का रखरखाव सही नहीं है। यदि समय रहते इस योजना की तरफ ध्यान दिया जाता तो आज यह समस्या नहीं आती। योजना की कमियों को दूर किया जाना चाहिए

शंकर वशिष्ठ, लेखक

* पेयजल योजना की तरफ कोई नहीं दे रहा ध्यान

*  14 अप्रैल, 2008 को अधूरी योजना का कर दिया था उद्घाटन

*  आठ साल से स्कीम अधूरी, पानी को तरस रही एक लाख आबादी

*  पहली स्टेज में दस लाख गैलन का वाटर स्टारेज टैंक तो बना, पर यूज तक नहीं किया

*  टैंक में लीकेज से व्यर्थ बह रहा लाखों गैलन पानी

*  सरकार-आईपीएच विभाग ने टैंक रिपेयर की सोची तक नहीं

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