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पर्यटन में निखार, जाम से निजात मांग रहा मंडी

छोटी काशी का नाम जब भी जहन में आता है तो मन में परंपराओं और दैवीय आस्थाओं की खूबसूरत तस्वीर बन जाती है, पर सियासत से लेकर संस्कृति तक अलग पहचान बनाने वाले मंडी में पर्यटन योजनाएं कभी धरातल पर नहीं उतर सकीं। यही वजह है कि शहर पर्यटकों को रिझा ही नहीं पाया। दूसरा; शहर का जाम भी मंडी पर बदनुमा दाग है, जिससे यहां के लोग छुटकारा पाना चाहते हैं। जरा गौर फरमाइए, शहर में पार्किंग के लिए दो बडे़ प्रोजेक्ट चार वर्षों से खटाई में हैं…

 मंडी— प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी व छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी सदर क्षेत्र राजनीति में सबसे ऊंचे दर्ज का रसूख रखता है। सदर की राजनीतिक लहरों में जब भी सुनामी आई है तो प्रदेश में सत्ता के गलियारों में कई नए अध्याय लिखे गए हैं, लेकिन इसके बाद मंडी केतारणहार सदर की मुख्य समस्याओं से लोगों को निजात नहीं दिला सके हैं। प्रदेश के साथ ही देश को पंडित सुखराम जैसे कद्दावर नेता देने वाला मंडी शहर दशकों बाद भी जाम व पार्किंग जैसी समस्याओं से बाहर नहीं निकल सका है। छोटी काशी का दर्जा होने के बाद भी न तो मंडी के पर्यटन पर योजनाएं धरातल का रूप ले सकी हैं और न ही शहर पर्यटकों को यहां रोकने में सफल हो पाया है। यही वजह है कि इस बार भी प्रदेश में बनने वाली नई सरकार से लोगों को यही दो बड़ी उम्मीदें लगी हुई हैं।  लोग चाहते हैं कि नई सरकार मंडी शहर में पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध करवाए। शहर के जाम से लोगों को निजात मिले और मंडी शहर भी धार्मिक व अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सके। ब्यास नदी के किनारे बसे होने बाद भी इसका फायदा शहर को नहीं मिल सका है।  शांत ब्यास की लहरों पर डैम बनाकर झील के जरिए वाटर स्पोर्ट्स व वाटर टूरिज्म की योजना भी ख्याली पुलाव ही बनी हुई है, जबकि इस योजना पर वर्षों पहले काम शुरू हो जाना चाहिए था। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन से भी शहर को जोड़ा जा सकता है, लेकिन यहां पर तो भगवान ही कब्जों के शिकार हैं, जबकि लोग मानते हैं कि अगर डैम के बाद झील बनाने और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में प्रयास किए जाएं तो कुल्लू मनाली जाने वाले पर्यटकों को मंडी शहर में भी रोका जा सकता है, जिससे स्थानीय लोगों का रोजगार व स्वरोजगार बढे़गा। शहर में पार्किंग के लिए दो बडे़ प्रोजेक्ट चार वर्षों से खटाई में पढे़ हुए हैं। शहर के दोनों तरफ से बाइपास निकाल कर जाम को खत्म करने की योजना भी फाइलों में दफन है, जबकि मंडी सदर के लोग अब नई सरकार से यह उम्मीद लगाए बैठें हैं कि जाम व पार्किंग की किल्लत से आने वाली सत्ता निजात दिलाएगी और रुके हुए सभी प्रोजेक्ट पूरे हो सकेंगे।

ये काम हो जाएं तो पूरी हो आस

  1. मंडी में क्लस्टर यूनिवर्सिटी की शुरूआत
  2. कून कात्तर में जल विद्युत परियोजना का काम शुरू हो
  3. रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए मार्केट का निर्माण
  4. सांस्कृतिक सदन व इंडोर स्टेडियम का निर्माण
  5. पुराने सीवरेज सिस्टम की जगह नई सीवरेज लाइन
  6. शहीद स्मारक का निर्माण
  7. क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण
  8. पंडोह में कालेज व आईटीआई की स्थापना
  9. कोटली में कालेज, पुलिस चौकी व आईटीआई के लिए अपने भवन
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