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बिलासपुर में सजा युवा महोत्सव

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदेश के 11 जिलों के 700 प्रतिभागियों की परखी जाएगी प्रतिभा

बिलासपुर— लोक संस्कृति को बचाने व संजोए रखने के लिए युवाओं के योगदान के साथ-साथ पौराणिक रीति-रिवाजों व परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि हम अपनी लोक संस्कृति के साथ जुड़े रहें और युवा पीढ़ी को भी साथ जोड़े रखें। ये शब्द बुधवार को बतौर मुख्यातिथि उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने बिलासपुर के बास्केटबाल ग्राउंड में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग द्वारा आयोजित 34वें राज्य स्तरीय तीन दिवसीय युवा उत्सव-2017 के शुभारंभ समारोह में कहे। उन्होंने कहा कि जिला बिलासपुर को भी 15 साल बाद राज्य स्तरीय युवा उत्सव आयोजित करने का गौरव प्राप्त हुआ है। यह उत्सव छह से आठ दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। वहीं उपनिदेशक युवा सेवाएं एवं खेल विभाग पदम सिंह नेगी ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए विभागीय गतिविधियों के अतिरिक्त समारोह की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युवा महोत्सव में प्रदेश के 11 जिलों के लगभग 700 प्रतिभागी स्टाफ  सहित भाग ले रहे हैं। महोत्सव में 11 प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी और सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी दलों को राष्ट्रीय युवा समारोह में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी बिलासपुर श्यामलाल कौंडल तथा युवा संयोजक रूप सिंह ठाकुर ने मुख्यातिथि को शॉल व टोपी पहनाई व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।  इस अवसर पर युवा महोत्सव में समस्त जिला के दल प्रभारी निर्णायक मंडल के सदस्य, कोच, नगर पार्षद, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

शास्त्रीय गायन, लोकगीत की झलक

बिलासपुर — राज्य स्तरीय युवा उत्सव के पहले दिन शास्त्रीय गायन, हारमोनियम प्रतियोगिता, लोक गीत व लोक नृत्य आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। लोक गीत में छह टीमों व लोक नृत्य में पांच टीमों ने भाग लिया। लोक गीत प्रतियोगिता में मंडी के कलाकारों ने दूधा छोलने रिया, सोलन ने सौणा लगो हिमाचल, ऊना ने बाजरे दा सिट्टा, शिमला ने सोणयो बुदुआ मामा व सिरमौर के कलाकारों ने फूल्ली करो ला फूल्टू आदि की शानदार प्रस्तुति दी। लोक नृत्य में कांगड़ा, चंबा, कुल्लू किन्नौर व बिलासपुर के कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति से ओत-प्रोत नृत्य की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। इन प्रतियोगिताओं में मोहन राठौर, डा. सूरत ठाकुर व डा. गुलेरिया ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई, जबकि शास्त्रीय गायन व हारमोनियम प्रतियोगिता में मुत्युंजय शर्मा, डा. राजीव शर्मा व डा. कश्मीर सिंह ने कलाकारों की प्रतिभा को परखा।

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