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विधवाओं की अनदेखी पर हिमाचल को दो लाख जुर्माना

शिमला— सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं के आश्रय और पुनर्वास से संबंधित उसके  दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर हिमाचल सरकार पर दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। हिमाचल के अलावा 11 अन्य प्रदेशों पर भी यह कार्यवाही की गई है। अभी कुछ ही दिन पहले हिमाचल को केंद्र सरकार द्वारा विकासात्मक कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया था, मगर अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश को विधवा महिलाओं की स्थिति को लेकर जो लताड़ लगाई गई है, वह काफी गंभीर मसला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परित्याग की गईं विधवाओं को लेकर प्रदेश सरकार के रवैये पर नाखुशी व्यक्त की गई है और हिमाचल को दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसी मामले में कोताही पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिमाचल के साथ-साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, मिजोरम, असम, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, तमिलनाडु व अरुणाचल प्रदेश आदि पर भी दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से एक ओर जहां प्रदेश सरकार के विधवाओं के कल्याण व उनके पुनर्वास के लिए किए जाने वाले दावों पर सवालिया उठने लगे हैं, वहीं अन्य राज्यों में भी विधवा महिलाओं की स्थिति ने विभिन्न सरकारों के रवैये की पोल खोल कर रख दी है। हिमाचल में इनकी संख्या दो लाख से भी ज्यादा बताई जाती है। कभी ये महिलाएं एकल नारी संगठन के बैनर तले अपनी मांगों को मुखर करती रही हैं तो कभी किसी अन्य मंच से। तमाम दावों के बावजूद अब सर्वोच्च न्यायालय की फटकार से ऐसे मामलों में सरकारी रवैये पर सवाल उठे हैं। गौर हो कि विधवाओं के हालात सुधारने पर सुझाव के लिए न्यायालय ने पांच-सदस्यीय समिति बनाई है, जिसमें वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। समिति में गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) जागोरी की सुनीता धर, गिल्ड फॉर सर्विस की मीरा खन्ना, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंघल जोशी, हेल्प एज इंडिया और सुलभ इंटरनेशनल का एक-एक प्रतिनिधि शामिल है। गत 18 जुलाई को न्यायालय ने कम उम्र की विधवाओं के पुनर्विवाह के बारे में योजना बनाने का भी केंद्र सरकार को निर्देश दिया था।

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