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आसानी से मिली सफलता कम आनंदित करती है

गुरुमंत्र

किसी इनसान की खराब आदतों में से एक है अपनी नाकामयाबी का जिम्मेदार दूसरों को ठहराना। इनसान की फितरत है कि जब वह किसी वजह से सफल नहीं हो पाता है, तो वह अपने आसपास के लोगों और परिचितों को दोषी ठहराने लगता है, लेकिन यह आदत उसकी भविष्य में सफल होने की संभावनाएं भी कम कर देती है…

वे लोग जो परेशानियों और अपनी आदतों के आगे जल्द घुटने टेक देते हैं, वे असफलताओं को साथ ढोने के आदी बन जाते है, जिसका प्रभाव उनके वर्तमान और भविष्य दोनों पर पड़ता है। सफलता की राह में बाधक आदतें जिंदगी में सफलता और असफलता का सिलसिला लगातार चलता रहता है। लेकिन कुछ लोग जल्द घुटने टेक देते हैं और असफलताओं को साथ में ढोने के आदी बन जाते हैं, जिसका प्रभाव उनके वर्तमान और भविष्य दोनों पर पड़ता है। कुछ खराब आदतें सफलता की राह  में रोड़े की तरह होती हैं, जिन्हें जितनी जल्दी हटा दिया जाए उतना बेहतर होता है। तो चलिये जानें सफलता की राह में बाधा बनने वाली आठ प्रमुख आदतें कौंन-कौन सी हैं।

निराशावादी विचारधारा

मुझसे नहीं होगा! जब कोई व्यक्ति यह सोचता है तो यकीनन उसका आत्मविश्वास जमीन पर होता है और वह निराशावादी विचारधारा अपनाए हुए होता है। सकारात्मक विचारधारा अपनाने और आशावादी बनने से सफलत की राह आसान होती है। क्योंकि निराशावादी विचारधारा इनसान को कुंठित कर देती है। कुछ व्यक्ति भूतकाल की असफलताओं से सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाते हैं, जबकि कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो भूतकाल की असफलताओं को हरदम अपने साथ ढोते रहते हैं और इसी के चलते वे सफलता की आहट भी नहीं पहचान पाते।

भूतकाल नहीं, वर्तमान में जिएं

अभी काम का मूड नहीं बना या अभी मूड नहीं है, जैसी आदतें सफलता की राह में दीवार की तरह होती हैं। अच्छा वक्त मूड की वजह  से रुकता नहीं है और इस प्रकार अच्छा अवसर मुठ्ठी से रेत की तरह फिसल जाता है और बाद में केवल पछतावा रह जाता है। मूड बनाएं, क्योंकि मूड बनाने से ही बनता है।

नजरिया बदलें

कुछ ठीक नहीं,  इस काम के लिए जरूरी चीजें ही नहीं, यह तो मुमिकन ही नही, जैसी चीजें दिमाग में आएं तो सोचिए कि यह खुद का नजरिया बदलने का समय है। यदि कुछ कर गुजरने की इच्छा है, तो नकारात्मकता को अपनी जिंदगी से बाहर फेंक दें और चीजों को एक सकारात्मक नजरिए से देखिए।

यह तो नामुमकिन है

एवरेस्ट पर पहले इनसान के चढ़ने से पहले लोग इस काम को नामुमकिन ही बताते थे। इस तरह वे लोग जो किसी काम को करने से पहले ही उसके लिए न होने की धारणा बना लेते हैं, वे निश्चित रूप से असफता से भरी सोच का प्रदर्शन कर रहे होते हैं।

मुझे इससे समस्या है

किसी इनसान की खराब आदतों में से एक है अपनी नाकामयाबी का जिम्मेदार दूसरों को ठहराना। इनसान की फितरत है कि जब वह किसी वजह से सफल नहीं हो पाता है, तो वह अपने आसपास के लोगों और परिचितों को दोषी ठहराने लगता है, लेकिन यह आदत उसकी भविष्य में सफल होने की संभावनाएं भी कम कर देती है।

जोखिम से डर

रिस्क तो सुपर मैन को भी लेना पड़ता है, तो आप तो बस एक इनसान हैं। जो लोग जोखिम लेने से डरते हैं, वे जीवन की कई संभावित सफलताओं के दरवाजे खुद ही बंद कर रहे होते हैं। बस जोखिम और पागलपन के बीच का भेद जरूर पता होना चाहिए। आसानी से मिली सफलता का स्वाद ज्यादा नहीं होता, जोखिम वाली सफलता ज्यादा आनंद देती है। हमेशा दूसरों को गलत और खुद को सही मानने की आदत असफलता की बड़ी निशानी है। अपने आगे किसी को सही न समझने वाला व्यक्ति हमेशा यह सोचता है कि केवल वही सही है और बाकी सभी गलत हैं और इसी ओवर कान्फिडेंस के चलते वह बार-बार असफलता का मुंह देखता है।

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