गलतियों से सबक लेकर सीरीज बचाने की चुनौती

आज से टीम इंडिया के लिए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन टेस्ट में करो या मरो का मुकाबला

सेंचुरियन— पहले मैच में मिली पराजय के बाद भारतीय टीम को चयन की दुविधाओं से उबरकर शनिवार से यहां शुरू हो रहे ‘करो या मरो’ के दूसरे मुकाबले में पिच की उछाल और दक्षिण अफ्रीका के तेज आक्रमण का बेहतर ढंग से सामना करना होगा। लगातार नौ शृंखलाएं जीतने का भारत का रिकार्ड शनिवार से दांव पर होगा, चूंकि मेजबान टीम ने पहला टेस्ट 72 रन से जीतकर तीन मैचों की शृंखला में 1-0 से बढ़त बना ली है। भारत को 2018-19 में विदेशी धरती पर 12 टेस्ट खेलने हैं और यह उनमें से दूसरा ही टेस्ट है। आलोचना झेल रही भारतीय टीम प्रबंधन को ऐसे में काफी सोच समझकर चयन करना होगा। स्टार खिलाड़ी विराट कोहली के नेतृत्व में टीम को वापसी के लिए आक्रामकता के साथ गलतियों में भी व्यापक सुधार करना होगा। केपटाउन की उछाल भरी तेज पिचों पर जहां भारतीय बल्लेबाजों ने पहले मैच में काफी संघर्ष किया था, वहीं फिर से उसके सामने इसी तरह की पिच चुनौती साबित होने वाली है। अफ्रीकी कोच ओटिस गिब्सन पहले ही साफ कर चुके हैं कि सेंचुरियन की पिच भी तेज गेंदबाजों के लिए मददगार होगी और वह इस मैच में भी चार तेज़ गेंदबाजों को अंतिम एकादश में शामिल करने की रणनीति पर काम करेंगे, जिससे भारतीय बल्लेबाजों पर खुद को साबित करने के साथ मैच बचाने की ज्यादा जिम्मेदारी होगी। कप्तान विराट इस बार भी विपक्षी टीम के लिये उनकी रणनीति के केंद्र में रह सकते हैं, लेकिन बाकी बल्लेबाज़ों को भी अपना खेल बेहतर करना होगा। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारतीय टीम में विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं और उसने कई मौकों पर इस तरह की परिस्थितियों में खुद को साबित किया है, लेकिन पिछले मैच में बल्लेबाज़ों के प्रदर्शन को देखें तो फिलहाल उसकी यही ताकत कमजोरी दिखाई दे रही है।

लोकेश राहुल का आना धवन का बाहर होना तय

शिखर धवन की जगह राहुल का खेलना तय है। धवन के दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में रिकार्ड को देखे तो यह 11 टेस्ट में सिर्फ 27.81 है। दक्षिण अफ्रीका में तीन टेस्ट में उनका औसत 18 रहा है और वह एक भी अर्द्धशतक नहीं बना सके। दूसरी ओर राहुल तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बल्लेबाज है।

इनको उतारने की भी अटकलें

नेट अभ्यास में केपटाउन में बेंच पर बैठे राहुल के अलावा अजिंक्या रहाणे, पार्थिव पटेल और इशांत शर्मा के जोर शोर से हिस्सा लेने पर साफ है कि सेंचुरियन में उनके लिए एकादश का रास्ता खुल सकता है।

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