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दिए बिन ज्ञान नहीं होता

स्वामी रामस्वरूप

हमें विचार करना चाहिए कि सृष्टि में परमेश्वर ने जो कुछ असंख्य पदार्थ रचे हैं वो बिना कारण अथवा व्यर्थ में नहीं रचे। उन पदार्थों से हम भौतिक उन्नति करके लाभ सुख ले सकें इसलिए रचे हैं। जैसे सूर्य, चंद्रमा, वायु,  अग्नि जैसे असंख्य पदार्थ हमें सुख देते हैं उसी प्रकार सृष्टि के आरंभ में ईश्वर जो हमें चार वेदों का ज्ञान देता है, वह भी बिना कारण और व्यर्थ नहीं है। वेदों में  ही सृष्टि के पदार्थों के विषय में जानकारी  दी है…

गतांक से आगे…

ऋग्वेद 10/7/4 में कहा है कि जो नर-नारी प्रतिदिन वेद मंत्रों से ईश्वर की स्तुति करते है ंउनकी स्तुतियां सफल हो जाती हैं, वे सदा सुखी रहते हैं, उनके कष्टों का नाश होता है। अगले ही  मंत्र में उपदेश है कि परमात्मा को अभ्यास और वैराग्य द्वारा अपने हृदय में प्रकट करें। हमें ईश्वर की वेद वाणी विद्वानों से सब प्रकार से प्राप्त हो। इस विषय में ऋग्वेद मंत्र 10/11/7 में कहा कि जो मनुष्य परमात्मा की वेद वाणियों को अपने जीवन में धारण कर लेता है और अपने अंदर आचरित करता है अर्थात वेद की शिक्षा को आचरण में लाता है और अपने अंदर समा लेता है वह तेजस्वी तथा अध्यात्म गुणों से संपन्न हो जाता है तथा कमनीय भोगों को प्राप्त करता हुआ संयमी होकर अपने को भूषित करता है। ऐसी स्थिति को प्राप्त करना ही मनुष्य जीवन का ध्येय है। हमें विचार करना चाहिए कि सृष्टि में परमेश्वर ने जो कुछ असंख्य पदार्थ रचे हैं वो बिना कारण अथवा व्यर्थ में नहीं रचे।  उन पदार्थों से हम भौतिक उन्नति करके लाभ सुख ले सकें इसलिए रचे हैं। जैसे सूर्य, चंद्रमा, वायु, अग्नि जैसे असंख्य पदार्थ हमें सुख देते हैं उसी प्रकार सृष्टि के आरंभ में ईश्वर जो हमें चार वेदों का ज्ञान देता है, वह भी बिना कारण और व्यर्थ नहीं है। वेदों में  ही सृष्टि के पदार्थों के विषय में जानकारी दी है। अतः बिना वेदों  के ज्ञान को प्राप्त किए हम किसी भी विषय की पूर्ण जानकारी न प्राप्त कर सकते और न ही पूर्ण लाभ ले सकते हैं। दूसरा वेदों में भौतिक पदार्थों के ज्ञान के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी दिया है और समझाया भी है कि वेदों के ज्ञान के बिना कोई भी ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता, अतः न सुखी रह सकता है, न दुखों का नाश कर सकता न मोक्ष प्राप्त कर सकता इत्यादि। इसलिए मनुष्य जीवन को प्राप्त करने का जो लक्ष्य है कि हमें क्यों मनुष्य का जीवन मिला।  इसको वेदों में यही कहकर समझाया है कि मनुष्य दुख अवश्य भोगता है और मनुष्य से नीच योनियां कुत्ते, बिल्ली आदि जन्म लेता है। अतः मनुष्य को दुख न हो, सुखी रहे इसलिए उसे वेदों का ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है, वेद ज्ञान प्राप्त करके वह भौतिक एवं आध्यात्मिक देनों उन्नतियों को साथ-साथ करता हुआ अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष सिद्ध करे, यही मानव शरीर प्राप्त करने का मुख्य लक्ष्य है।

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