himachal pradesh news, himachal pradesh top stories, himachal pradesh tourism

पद्मदेव ने किया सुकेत सत्याग्रह का नेतृत्व

उन्होंने ‘रीत’, ‘बेगार’ और ‘छुआछूत’ के विरुद्ध बेरोक संघर्ष किया और विशेषकर कोली जाति से भेदभाव के विरुद्ध। उन्होंने सुकेत सत्याग्रह का नेतृत्व भी किया। सुकेत सत्याग्रह हिमालयन रियासतों में किसी रियासत के राजा के विरुद्ध अपनी किस्म की पहली अहिंसात्मक कार्रवाई थी…

नरेंद्र देव जोशी

नरेंद्र देव जोशी का जिला मंडी के लूण मंडी में 15 मई, 1892 ई. को जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम गोपाल चंद था। 1912 ई. में एक अंग्रेज की हत्या के साथ स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश किया। सूरत में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए 1918 ई. में गोली लगने से जख्मी हो गए। जलियांवाला बाग (1919) की त्रासदी के बाद इन्हें पांच वर्ष की जेल हुई। इन्हें 1924 ई. में रिहा किया गया। किसी तरह इनकी ब्रिटिश विरोधी गतिविधियां चलती रहीं। रावलपिंडी बम विस्फोट कांड में इन्हें तीन साल के लिए बंदी बनाया गया। 1928 ई. में वह पुनः बंदी बनाए गए। 1932 ई. में हिसार (हरियाणा) में एक साल की कैद हुई। वह सविनय अवज्ञा आंदोलन में और सीमित सत्याग्रह के दिनों में सक्रिय स्वयंसेवी थे। 1934 ई. में तीन साल की सजा हुई। 1936 ई. के बाद इन्होंने आर्य समाज की गतिविधियों पर ध्यान दिया।

पद्म देव

इनका जन्म 26 जनवरी, 1901 ई. को शिमला जिला की तहसील रोहड़ू के भमनोल गांव में हुआ। इन्हें कविराज की उपाधि दी गई। उनके पिता का नाम श्री बाली राम था। प्राइमरी शिक्षा के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। 1920 ई. के असहयोग आंदोलन और 1930 ई. के  सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। वह हिमालयन रियासती प्रजामंडल के संस्थापक सदस्य थे और प्रजामंडल सचिव के रूप में इन्होंने सराहनीय  कार्य किया। वह हिमालयन पहाड़ी रियासतों की क्षेत्रीय परिषद के महासवि भी थे। उन्होंने ‘रीत’ ‘बेगार’ और ‘छुआछूत’ के विरुद्ध बेरोक संघर्ष किया और विशेषकर कोली जाति से भेदभाव के विरुद्ध। उन्होंने सुकेत सत्याग्रह का नेतृत्व भी किया। सुकेत सत्याग्रह हिमालयन रियासतों में किसी रियासत के राजा के विरुद्ध अपनी किस्म की पहली अहिंसात्मक कार्रवाई थी। 1952 में कांग्रेस टिकट पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और प्रदेश के पहले गृहमंत्री बने। 1957 में लोकसभा के लिए चुने गए और 1962 ई. में टेरीटोरियल परिषद के लिए और दोबारा 1967 में विधानसभा के लिए सम्मानित किया गया।

मुंशी राम

इनका जन्म 15 दिसंबर, 1916 ई. को जिला कांगड़ा के कोटा गांव में हुआ। इनके पिता श्री जयकरण दास थे। इन्होंने दयाल सिंह कालेज लाहौर से स्नातक की डिग्री ली। 1930 ई. में नमक सत्याग्रह में भाग लिया और बंदी बना लिए गए। वह कालेज यूनियन के सक्रिय सदस्य थे। लाहौर से वापस आने के बाद इन्होंने सामाजिक कल्याण के काम शुरू किए। 1943 ई. से 1945 ई. तक वह जेल में रहे। 1946 ई. में कांग्रेस पार्टी के महासचिव बने। शीघ्र ही इन्होंने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दे दिया और कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। वह शांति सम्मेलन के सदस्य भी रहे और उन्होंने रूस और चैकोस्लोवाकिया की यात्राएं कीं। 1967 ई. में उन्हें हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुना गया। इनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए इन्हें सम्मानित किया गया था।

You might also like
?>